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झूठ पर बेला

झूठ मिथ्या या असत्य

वचन है। इसे सत्य का छद्म या भ्रम भी कहा जाता है। यहाँ झूठ शब्द-केंद्र पर परिधि पारती कविताओं का एक चयन प्रस्तुत है।

18 सितम्बर 2026

कहानी : क्या सच, क्या झूठ

18 सितम्बर 2026

कहानी : क्या सच, क्या झूठ

“फूल क्यों तोड़ रही हो?”  पीछे से आई गार्डनर की कड़क आवाज़ पर हव्वा सकपका गई... “मालकिन रोज़ तुड़वाती है” कह ज़ब्ह के लिए तैयार मेमने सी तेज़-तेज पलकें झपकाने लगी। भ्रांति में पड़कर वह हमेशा ऐसा

18 जुलाई 2026

‘चिरई के जान जाई औ’ लइकन के खिलौना’

‘चिरई के जान जाई औ’ लइकन के खिलौना’

लगभग दो दिन बीत चुके हैं किसी किताब को उठाए या ध्यान से कुछ पढ़े हुए। कहीं मन ही नहीं लग रहा। वह तो बार-बार भावुक हुआ जाता है। कई बार रोने का मन करता है। संवेदना की कितनी ही लहरें शरीर के पूरे हिस्से

02 दिसम्बर 2025

क्रेज़ी किया रे : AI के दौर में मौलिकता की बात

क्रेज़ी किया रे : AI के दौर में मौलिकता की बात

21 नवंबर को मंचित नाटक ‘क्रेज़ी किया रे’ ने एक बार फिर यह सशक्त संदेश दिया कि जब व्यक्ति अपनी मौलिकता छोड़कर किसी और की नक़ल में डूब जाता है, तो वह अनजाने में ही हास्य का पात्र बन जाता है। समाज में ऊ

24 अगस्त 2025

बार्बी : सुंदरता के झूठे मानकों की गुड़िया!

बार्बी : सुंदरता के झूठे मानकों की गुड़िया!

बचपन किसी भी मनुष्य के जीवन की सबसे कोमल और संवेदनशील अवस्था होती है। इस अवस्था में जिन वस्तुओं से हम जुड़ते हैं, वे हमारी सोच, आत्मबोध और समाज को देखने की दृष्टि का आधार बन जाती हैं। लड़कियों के लिए