04 अक्तूबर 2026
रील रसाचार्य : रील काटने और कटवाने वाले
जब कोई वक्ता किसी सार्वजनिक मंच पर बोलता है और जानता है कि कैमरे लगातार उसे रिकॉर्ड कर रहे हैं, तो वह कुछ अतिरिक्त सतर्क हो जाता है। उसे डर रहता है कि उसकी बात मीम या रील में बदल जाएगी, संदर्भ से काट
27 सितम्बर 2026
रील रसाचार्य : फ़ाइव रील-एक्सपेरिमेंट
एक दोस्त के साथ फ़िल्म देख रहा था। हर महत्त्वपूर्ण दृश्य से पहले; आगे क्या होने वाला है, उसे पहले से पता था। जब ऐसा दो बार हो गया तो मैंने कहा कि जब फ़िल्म पहले से ही देख रखी है तो क्या ज़रूरत थी दुब
कहानी : खिल्ली विनाशालय
मेरे देश का नाम है—घरघराहट! मेरा प्यारू देश है दुनिया का सबसे न्यारू देश और मेरे देश से बाहर जो भी हैं वे सब साले हैं झरझरालू देश। मेरा अपना पर्सनल नाम सुकुमार समस्या कुमार है। मेरे पैदा होने के ब
कहानी : प्रेम और अपराध और दंड
इतनी बारिश! इतनी बारिश कब हुई थी, याद नहीं आता। संभव है कभी हुई ही न हो... गाँव के दक्खिन की तरफ़ की बसावट जिसे कुछ लोग ‘हरिजन बस्ती’ भी कहते थे और उन कुछ में कुछ वे लोग थे जो एक मँझे हुए राजन
केवल इम्तियाज़ हँस रहा है और सब रो रहे हैं
किसे चाहिए मन का सोना आँख का मोती किसे पड़ी है अंदर क्या है होती रेत है लगता पानी [वर्ष 2015 में आई इम्तियाज़ अली निर्देशित फ़िल्म ‘तमाशा’ से।] मैं गए बुधवार इम्तियाज़ अली का इं
नई पीढ़ी नए बदलाव : इमोजी से रील्स तक
विश्वविद्यालयों में हिंदी साहित्य की कक्षाओं की अपनी टिपिकल संस्कृति होती है—चरणस्पर्शी और बहुत छुईमुई। इन कक्षाओं में प्रेमचंद, प्रेमचंद नहीं रहते, “प्रेमचंद जी” हो जाते हैं, “निराला जी”, “मुक्ति