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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

18 मार्च 2026

‘भारतीय सड़कें जादूगर का मंच हैं!’

‘भारतीय सड़कें जादूगर का मंच हैं!’

आजकल मैं ड्राइविंग सीख रहा हूँ। मेरे घरवाले बड़े समय से मुझसे कहते घूम रहे थे कि उन्हें घर में एक ड्राइवर की कमी खलती है। “पैसा देकर ड्राइवर रखना हम अफ़्फोर्ड नहीं कर सकते। फिर ये स्साले ड्राइवर चो

17 मार्च 2026

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

“अब भी क्या गले न मिलोगी? अभी तक वही हिचक... मिल लो यार, क्या पता अगली मुलाक़ात हो न हो।” उसकी पसीजी हुई हथेलियाँ छूट रही थीं मुझसे। वो गले लगने या लगाने को बेताब था। विदा की बेला में ये बातें मेर

13 मार्च 2026

जो घुला नहीं

जो घुला नहीं

बचपन में जब मेरी माँ दुपहर के वक़्त आराम करते हुए सो जाया करती थी, तब मेरी बड़ी बहन और मैं किचन में जाकर खाना बनाने का खेल खेला करते थे। मैं इतनी छोटी थी कि मुझे चूल्हा जलाना तक नहीं आता था और घर में आ

10 मार्च 2026

पिंजड़े में क़ैद ज़िंदगी

पिंजड़े में क़ैद ज़िंदगी

इस साल सारी आपदाएँ एक साथ आने को व्याकुल हों जैसे। अभी तो मानसून की आहट भी नहीं और बादल हैं कि रोज़ सावन-भादो हुए जाते हैं। सुबह से शुरू हुई बारिश बंद होने का नाम ही नहीं ले रही है। बाबू कहने को दस स

06 मार्च 2026

जगह-जगह 2.0  : द मैजिक माउंटेन : मनुष्य-चेतना पर महामारी के चिह्न

जगह-जगह 2.0 : द मैजिक माउंटेन : मनुष्य-चेतना पर महामारी के चिह्न

एक …अगर वह फ़िलॉसॅफ़िकल है तो एक ऐसे अर्थ में जिसके लिए अक्सर हम ‘फ़िलॉसॅफ़ी’ जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करते, पर जो अपनी अंत:प्रक्रिया में ही एक तरह का सोच, एक तरह का निश्चय, एक तरह की रिफ़्लेक्टिवने

03 मार्च 2026

बनारस की मसान होली : जीवन और मृत्यु का अद्वैत संगम

बनारस की मसान होली : जीवन और मृत्यु का अद्वैत संगम

धार्मिक-ग्रंथों और पुराणों के अनुसार काशी जिसे स्वयं शिव के त्रिशूल पर टिकी नगरी माना जाता है, संसार के उन विरल स्थानों में से एक है जहाँ मृत्यु को शोक नहीं, बल्कि मोक्ष का द्वार माना जाता है। शास्त्

02 मार्च 2026

होली खेलें रघुवीरा अवध में

होली खेलें रघुवीरा अवध में

बसंत को लेकर अब तक इतना गाया-बजाया गया, इतना लिखा-पढ़ा गया, इतना ढोल-नगाड़ा-झाँझ पीटा गया, इतनी धुन-रागिनियाँ बनीं—फिर भी आज तक न तो कोई इससे ऊबा और न उकताया। ऐसा क्या है कि पपीहे और कोयल की एक ही रट भ

28 फरवरी 2026

भगोरिया : होली का हाट, भागकर शादी करने का पर्व नहीं

भगोरिया : होली का हाट, भागकर शादी करने का पर्व नहीं

भाया कावळियाँ लाय दो जी, कावळियाँ पेरीनऽ मी तो भोंगर्यों देखूँगा। यह एक निमाड़ी गीत है। मध्य प्रदेश के निमाड़ और मालवा अंचल में यह गीत काफ़ी लोकप्रिय है। इस गीत के माध्यम से बहन अपने भाई से मनुहा

25 फरवरी 2026

आख़िर कितना चक दे इंडिया!

आख़िर कितना चक दे इंडिया!

पिछले कुछ वर्षों से क्रिकेट नित्यकर्म की तरह हो चला है। हर रोज़ क्रिकेट खेला जा रहा है। हर रोज़ फेंकी जा रही है बॉल, हर रोज़ घुमाया जा रहा है बल्ला और हर रोज़ ही छूट रही हैं कैचें! इस रोज़मर्रा की क्

24 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

नवीं कड़ी से आगे... दस अरुण कमल सत्तर साल से अधिक का जीवन देख चुके हैं और वरिष्ठ कवियों की सूची में भी आ चुके हैं। अरुण कमल हिंदी में प्रसिद्ध और लोकप्रिय कवि भी हैं। कभी रामचंद्र शुक्ल ने लिखा