जब नाव नदी को पहली बार स्पर्श करती है
सुना और पढ़ा था कि जिस दिन नदी में नाव उतारी जाती है; वह दिन नाविक के जीवन में एक महत्त्वपूर्ण दिन होता है, लेकिन इस घटना
03 मार्च 2026
बनारस की मसान होली : जीवन और मृत्यु का अद्वैत संगम
धार्मिक-ग्रंथों और पुराणों के अनुसार काशी जिसे स्वयं शिव के त्रिशूल पर टिकी नगरी माना जाता है, संसार के उन विरल स्थानों
होली खेलें रघुवीरा अवध में
बसंत को लेकर अब तक इतना गाया-बजाया गया, इतना लिखा-पढ़ा गया, इतना ढोल-नगाड़ा-झाँझ पीटा गया, इतनी धुन-रागिनियाँ बनीं—फिर भी
बकुला मरलें, बकुली रूसल जाली! : कथा और कथा की समझ
भोजपुरी में न जाने कितनी लोककथाएँ हैं। कुछ तो लोक में ख़ूब प्रचलित हैं और बहुतेरी कथाएँ लगभग विलुप्ति के कगार पर हैं। न
गमछा : एक नमीदार सहचर
जब भी मैं किसी थके हुए आदमी को देखती हूँ, जिसकी गर्दन पर पसीने से भीगा गमछा रखा होता है, मुझे सोबरन कक्का याद आते हैं। उ
कहाँ गए वे लोकगीतों वाले दिन
कभी-कभी मेरे मन में एक दृश्य उतरता है। दृश्य—घनघोर बारिश का। चारों तरफ़ पानी-ही-पानी। मैं अकेले किसी वृक्ष के नीचे बैठा
लोक : ओरी से उतरती अंतिम बूँद का परब
आँगन की वह जगह जहाँ छप्पर का पानी धरती पर ढरता है, उसे ‘ओरी’ कहते हैं। कवि मलिक मोहम्मद जायसी कहते हैं—‘बरिसै मघा झँकोरि