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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

05 जुलाई 2025

‘सब जानते हैं, इल्म से है ज़िंदगी की रूह… पर AI से?’

‘सब जानते हैं, इल्म से है ज़िंदगी की रूह… पर AI से?’

तीसरी कड़ी से आगे... भाषा और विचार भाषा और विचार के संबंध में फिलॉसफी में एक पुराना और गहरा सवाल है। क्या हम भाषा के बिना सोच सकते हैं? और क्या AI, जो भाषा को इतनी कुशलता से प्रोसेस करता है, अस्

04 जुलाई 2025

AI हमें पता है, तुम हमसे खेल रहे हो!

AI हमें पता है, तुम हमसे खेल रहे हो!

दूसरी कड़ी से आगे... नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) को आप एक मशीन के लिए भाषा में महारत हासिल करने का कोर्स समझ सकते हैं। यह कोई रट्टा मारने वाला कोर्स नहीं, बल्कि

03 जुलाई 2025

AI अगले वीक ऑफ़ के लिए क्या ‘सोच’ रहे हो!

AI अगले वीक ऑफ़ के लिए क्या ‘सोच’ रहे हो!

पहली कड़ी से आगे... गणना बनाम अंतर्ज्ञान साल 1997 में शतरंज की दुनिया ने एक ऐतिहासिक पल देखा, जब IBM के सुपरकंप्यूटर डीप ब्लू (Deep Blue) ने तब के वर्ल्ड चैंपियन गैरी कास्पारोव को हराया। यह पहल

02 जुलाई 2025

AI तुम वस्ल और हिज्र के लुत्फ़-ओ-ग़म को कैसे महसूस करोगे!

AI तुम वस्ल और हिज्र के लुत्फ़-ओ-ग़म को कैसे महसूस करोगे!

दुनियाभर के टीनएजर रूबिक्स क्यूब नाम की एक नई रंगीन पहेली में उलझे थे। डार्थ वेडर (स्टार वार्स फ़्रैंचाइज़ी में एक काल्पनिक चरित्र) एक जवान लड़के को उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा और सबसे कड़वा सच बता रहा था

28 जून 2025

बारहमासी के फूल

बारहमासी के फूल

मुझे तस्वीरें निकालने का बड़ा भारी शौक़ है। ख़ूब तस्वीरें निकालता हूँ उनकी—जो सुंदर लग जाए मन को, जो रमणीक हो, जो मनोरम हो। इसी कारण फूलों की तस्वीरें भी निकालता आया हूँ, लेकिन इस वसंत मैंने फूलों पर ग

27 जून 2025

आचार्य शुक्ल के इतिहास के बहाने : आदिकाल के अप्रासंगिक होने पर सवाल?

आचार्य शुक्ल के इतिहास के बहाने : आदिकाल के अप्रासंगिक होने पर सवाल?

सास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ। —३६, अरण्यकाण्ड, श्रीरामचरितमानस तुलसी की इस पंक्ति का शीर्षक रूप में प्रयोग करते हुए ‘नागरीप्रचारिणी सभा’ द्वारा आचार्य रामचंद्र शुक्ल के पुनर्संस्कारित इतिहास

26 जून 2025

नायक खोजते अ-नायक हो तुम

नायक खोजते अ-नायक हो तुम

उल्टी धार के लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए। परेशानियों का शुक्रिया कहना चाहिए। अधम मनुष्यों से दूर रहना चाहिए। कविता में सूक्तियों के बारे में जो सोचते हो, गद्य में अगर सूक्तियाँ बन जाती हों, तो उनको बन

24 जून 2025

'आलोचना' सह पाएगी अपनी आलोचना!

'आलोचना' सह पाएगी अपनी आलोचना!

राजकमल प्रकाशन समूह की त्रैमासिक पत्रिका ‘आलोचना’ [अंक-77] ने ‘इक्कीसवीं सदी की हिंदी कविता’ शीर्षक से एक विशेषांक गए दिनों प्रकाशित किया। इस अंक पर साहित्य संसार में काफ़ी बातचीत हुई, जिसे फ़ेसबुकिया

23 जून 2025

महान् कविताओं के बिंब कैसे होते हैं!

महान् कविताओं के बिंब कैसे होते हैं!

दुपहर हो गई थी। मेरा वह साथी अपनी लंबी कविता का कुछ हिस्सा पढ़ाकर वापस लौट आया था। उसने आते ही मुझे फ़ोन किया और लाइब्रेरी से बाहर बुला लिया। आज वह चहक रहा था। उसके चेहरे पर अतिरिक्त उत्साह के निशान स

22 जून 2025

सब कुछ ऊब के ख़िलाफ़ एक तिलिस्म है

सब कुछ ऊब के ख़िलाफ़ एक तिलिस्म है

एक  It doesn’t take much to console us, because it doesn’t take much to distress us. The Misery of Man without God (B. Pascal, Pensées) मैं पहली बार बर्फ़ से ढके पहाड़ देख रहा था—वह कुछ और