साहित्य और संस्कृति की घड़ी
18 फरवरी 2026
तीसरी कड़ी से आगे... चार 2019 में प्रकाशित अरुण कमल की एक कविता है—‘एक वृद्ध की रात’। एक बूढ़ा है जो जानता है कि ‘कुछ तो है जो मुझे खड़ा कर रहा इस उम्र में’। जिस उम्र में लोग तीर्थ पर निकल जाते है
प्रिय सेबास्टिओं, प्रेरणा के अमिट स्रोत शांति और सामंजस्य के दूत विविधता के उपासक, प्रकृति के अद्भुत सहचर आज से 12 साल पहले मेरे एक फ़ोटोग्राफ़र मित्र अमन ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया था।
17 फरवरी 2026
दूसरी कड़ी से आगे... तीन मेरे लिए वे कविता का ककहरा सीखने के दिन थे। कवि-मित्र प्रकाश के सहारे यह संग्रह ‘अपनी केवल धार’ पढ़ गया। यह ‘धार’ कविता दिमाग़ में बैठ गई थी। मैंने उन दिनों अपने मित्रों
16 फरवरी 2026
पहली कड़ी से आगे... दो कभी-कभी एक कहानी, एक उपन्यास और एक कविता भी आपको अमर कर सकती है। अरुण कमल की यह रोमांटिक, उधार वाली कविता इस श्रेणी की कविता है। कभी तुलसीदास ने लिखा था, “नहिं दरिद्र सम
15 फरवरी 2026
एक मुक्तिबोध मेरे प्रिय कवि हैं। उनकी कविता-पंक्तियाँ मुझे बूस्ट करती हैं, मतलब प्रेरणा प्रदान करती हैं। यहाँ प्रस्तुत आलेख का शीर्षक उनकी एक कविता का शीर्षक है। मुक्तिबोध की ‘अँधेरे में’ शीर्षक स
दूर तक फैले कीकर और बबूल के पेड़ों के बीच कच्ची पगडंडी पर सीताफल के दो पेड़ थे। उसी कच्ची पगडंडी पर चलते हुए ज़रा पीछे की ओर गरदन मोड़ लो तो सरकारी स्कूल का फाटक दिखने लगता था। लड़का-लड़की छुट्टी के
मैं अब किसी से प्रेम नहीं कर पाती हूँ। मैं इसे समझ पा रही हूँ कि मैं क्यों किसी से प्यार नहीं कर पा रही हूँ, लेकिन लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं। मेरी आँखों में अब किसी के लिए आँसू नहीं आते। सिर्फ़ एक
‘‘अगर तुम किसी के लिए अच्छा नहीं कह सकते, तो कुछ भी मत कहना...’’ अज्ञात-काया में जाने किस तरह की रोशनी होती है। इन दिनों कथाकार की ज़िंदगी अधलिखी पंक्तियों जैसी है। उसके सपनों की ज़मीन पर अनहोनी क
कई अनुपस्थितियों से अन्य हाज़िरियों का पंचांग मज़बूत हो जाता है, कई रविवासरीय दर्ज करने के सुयोग बनते हैं। यह हाज़िरी किताब पर लगी। पढ़ने के बाद आख़िरी पन्ने पर। ब-तर्ज़ ‘ब्रुक्स वॉज़ हेयर’ पेंसिल से
09 फरवरी 2026
मैं पहली बार शहर आए किसी गँवई किसान-सा निहारता था चीज़ों को अलबत्ता देखे थे कई शहर जीवन के धूप-छाँव में यात्राएँ कहीं पीछे छूट जाती हैं। जीवन में आने वाली समानांतर समस्याएँ समझौते करने को वि