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होली पर बेला

रंग-उमंग का पर्व होली

कविताओं में व्यापक उपस्थिति रखता रहा है। होली में व्याप्त लोक-संस्कृति और सरलता-सरसता का लोक-भाषा की दहलीज़ से आगे बढ़ते हुए एक मानक भाषा में उसी उत्स से दर्ज हो जाना बेहद नैसर्गिक ही है। इस चयन में होली और होली के विविध रंगों और उनसे जुड़े जीवन-प्रसंगों को बुनती कविताओं का संकलन किया गया है।

03 मार्च 2026

बनारस की मसान होली : जीवन और मृत्यु का अद्वैत संगम

बनारस की मसान होली : जीवन और मृत्यु का अद्वैत संगम

धार्मिक-ग्रंथों और पुराणों के अनुसार काशी जिसे स्वयं शिव के त्रिशूल पर टिकी नगरी माना जाता है, संसार के उन विरल स्थानों

02 मार्च 2026

होली खेलें रघुवीरा अवध में

होली खेलें रघुवीरा अवध में

बसंत को लेकर अब तक इतना गाया-बजाया गया, इतना लिखा-पढ़ा गया, इतना ढोल-नगाड़ा-झाँझ पीटा गया, इतनी धुन-रागिनियाँ बनीं—फिर भी

28 फरवरी 2026

भगोरिया : होली का हाट, भागकर शादी करने का पर्व नहीं

भगोरिया : होली का हाट, भागकर शादी करने का पर्व नहीं

भाया कावळियाँ लाय दो जी, कावळियाँ पेरीनऽ मी तो भोंगर्यों देखूँगा। यह एक निमाड़ी गीत है। मध्य प्रदेश के निमाड़ और माल

14 मार्च 2025

जीवन का आनंद है होली

जीवन का आनंद है होली

होली हिंदू जीवन का आनंद है। जीवन में यदि आनंद न हो तो वह किस काम का? जिये सो खेले फाग, मरे सो लेखे लाग। मानो जीवन

13 मार्च 2025

पहाड़ों की होली : रंग नहीं थे, रंगीनियाँ पूरी थीं

पहाड़ों की होली : रंग नहीं थे, रंगीनियाँ पूरी थीं

मेरे पास होली की स्मृतियों में रंगों की कोई स्मृति नहीं है। शोर में डूबे इस शहर में जब रंगों में डूबी हुई होली देखता हूँ