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प्रेम पर ग़ज़लें

प्रेम के बारे में जहाँ

यह कहा जाता हो कि प्रेम में तो आम व्यक्ति भी कवि-शाइर हो जाता है, वहाँ प्रेम का सर्वप्रमुख काव्य-विषय होना अत्यंत नैसर्गिक है। सात सौ से अधिक काव्य-अभिव्यक्तियों का यह व्यापक और विशिष्ट चयन प्रेम के इर्द-गिर्द इतराती कविताओं से किया गया है। इनमें प्रेम के विविध पक्षों को पढ़ा-परखा जा सकता है।

आदमी अब हो गइल

कृष्णानन्द कृष्ण

आदमीयत के धरम

ए. कुमार ‘आँसू’

घटी का, बढ़ल

गहबर गोवर्द्धन

आदमी के का भरोसा

कृष्णानन्द कृष्ण

गाँव जे शहर

कृष्णानन्द कृष्ण

सफर में गर

अशोक द्विवेदी

उमिर के सँवारत

कृष्णानन्द कृष्ण

नोर

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

तहरा सुधियन के

अशोक द्विवेदी

बस नजाकत, तकल्लुफ

गहबर गोवर्द्धन

मकान बा सटल-सटल

कृष्णानन्द कृष्ण

जहर नस-नस चढ़ल

कृष्णानन्द कृष्ण

तन के तितली

जौहर शफियाबादी

रात के भेद

मिथिलेश ‘गहमरी’

हमरा हालात से

तैयब हुसैन पीड़ित

अहाँ जानै छी

राम चैतन्य धीरज

आदमी आदमी में होखेला

जौहर शफियाबादी

आपन बूते राह

अशोक अज्ञानी

रो-रो के सनेहिया

जौहर शफियाबादी

तीर करेजा के

मिथिलेश ‘गहमरी’

ऊखम से फूल

जौहर शफियाबादी

दरद जिन्दगी के सजा

जौहर शफियाबादी

सुनसान पांतरमे

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

दिल के सुलझी

जौहर शफियाबादी

नेह घर से

जौहर शफियाबादी

जागल बा दिल

मिथिलेश ‘गहमरी’

हृदयक सिनेह

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

भुला देल तू जे

तैयब हुसैन पीड़ित

आग नफरत के

कृष्णानन्द कृष्ण

सुखद सन स्पर्श

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

प्यार जग के सार

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

याद के तहरे

जौहर शफियाबादी

तू याद-झरोखे आ जा

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

मुस्की भरल स्नेह दियऽ

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

याद में तहरा

अशोक द्विवेदी

प्रीत के पाहुन

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

कढ़ावल प्रीत के के गीत

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

इश्क़

नवल बिश्नोई

हृदयकेर तार छिनायल

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी