प्रेम पर गीत

प्रेम के बारे में जहाँ

यह कहा जाता हो कि प्रेम में तो आम व्यक्ति भी कवि-शाइर हो जाता है, वहाँ प्रेम का सर्वप्रमुख काव्य-विषय होना अत्यंत नैसर्गिक है। सात सौ से अधिक काव्य-अभिव्यक्तियों का यह व्यापक और विशिष्ट चयन प्रेम के इर्द-गिर्द इतराती कविताओं से किया गया है। इनमें प्रेम के विविध पक्षों को पढ़ा-परखा जा सकता है।

रहना तू

प्रसून जोशी

मुझे पुकार लो

हरिवंशराय बच्चन

तुम्हारे नील झील-से नैन

हरिवंशराय बच्चन

निवेदन

जयशंकर प्रसाद

जो तुम आ जाते एक बार

महादेवी वर्मा

मन के पास रहो

रमानाथ अवस्थी

तुम से

नरेंद्र शर्मा

प्यार का क्षण

रमानाथ अवस्थी

अब तुम्हारा प्यार भी

गोपालदास नीरज

निभाना ही कठिन है

गोपालदास नीरज

देखो न

प्रसून जोशी

मधुमालती

नरेंद्र शर्मा