प्रेम पर कुंडलियाँ

प्रेम के बारे में जहाँ

यह कहा जाता हो कि प्रेम में तो आम व्यक्ति भी कवि-शाइर हो जाता है, वहाँ प्रेम का सर्वप्रमुख काव्य-विषय होना अत्यंत नैसर्गिक है। सात सौ से अधिक काव्य-अभिव्यक्तियों का यह व्यापक और विशिष्ट चयन प्रेम के इर्द-गिर्द इतराती कविताओं से किया गया है। इनमें प्रेम के विविध पक्षों को पढ़ा-परखा जा सकता है।

मोती लावन पिय गए

गिरिधर कविराय

सोना लावन पिव गये

गिरिधर कविराय

अद्भुत डोरी प्रेम की

राय देवीप्रसाद ‘पूर्ण’

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