स्मृति पर कविताएँ

स्मृति एक मानसिक क्रिया

है, जो अर्जित अनुभव को आधार बनाती है और आवश्यकतानुसार इसका पुनरुत्पादन करती है। इसे एक आदर्श पुनरावृत्ति कहा गया है। स्मृतियाँ मानव अस्मिता का आधार कही जाती हैं और नैसर्गिक रूप से हमारी अभिव्यक्तियों का अंग बनती हैं। प्रस्तुत चयन में स्मृति को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

उसी शहर में

ध्रुव शुक्ल

चश्मा

राजेंद्र धोड़पकर

या

सौरभ अनंत

हंडा

नीलेश रघुवंशी

अगले सबेरे

विष्णु खरे

चौराहा

राजेंद्र धोड़पकर

पिता

नवीन रांगियाल

यादगोई

सुधांशु फ़िरदौस

आरर डाल

त्रिलोचन

मेघदूत विषाद

सुधांशु फ़िरदौस

तुम्हारा नाम

राजेंद्र धोड़पकर

याद नहीं

मनमोहन

गर्मियों की शाम

विष्णु खरे

इलाहाबाद

संदीप तिवारी

ख़तरा

कुमार अम्बुज

पहाड़ पर लालटेन

मंगलेश डबराल

याद

कैलाश वाजपेयी

फ़ैमिली अलबम

विजया सिंह

पूर्वजन्म

राजेंद्र धोड़पकर

झूला

नरेंद्र जैन

विस्मृति

मनमोहन

तुम अगर सिर्फ़

सारुल बागला

शहर फिर से

मंगलेश डबराल

पेड़ों का अंतर्मन

हेमंत देवलेकर

टॉर्च

मंगलेश डबराल

प्रेम लौटता है

गौरव गुप्ता

गुमशुदा

मंगलेश डबराल

बासी रोटियाँ

उपासना झा

अवसाद का रंग

ऋतु कुमार ऋतु

दो बारिशों के बीच

राजेंद्र धोड़पकर

तस्वीर

मंगलेश डबराल

बीच की जगहें

गार्गी मिश्र

ट्राम में एक याद

ज्ञानेंद्रपति

एक जुलाई

संदीप तिवारी

घर

शुभम् आमेटा

सरमाया

सुधांशु फ़िरदौस

किराए का घर

संदीप तिवारी

आश्वासन

अमित तिवारी

उसका आना

राजेंद्र धोड़पकर

हँसी

विष्णु खरे

पहाड़गंज

नवीन रांगियाल

अनुपस्थिति

गार्गी मिश्र