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प्रेम पर पद

प्रेम के बारे में जहाँ

यह कहा जाता हो कि प्रेम में तो आम व्यक्ति भी कवि-शाइर हो जाता है, वहाँ प्रेम का सर्वप्रमुख काव्य-विषय होना अत्यंत नैसर्गिक है। सात सौ से अधिक काव्य-अभिव्यक्तियों का यह व्यापक और विशिष्ट चयन प्रेम के इर्द-गिर्द इतराती कविताओं से किया गया है। इनमें प्रेम के विविध पक्षों को पढ़ा-परखा जा सकता है।

नीवी करषत बरजत

कृपानिवास

हरि को भलौ मनाइये

परमानंद दास

पिया हो, कसकत कुस पग बीच

सुधाकर द्विवेदी

वंशी माधुरी

विद्यापति

जागत सब निसि कहाँ रहे

गोविंद स्वामी

हिन्दवी उत्सव 2026

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