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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

10 अप्रैल 2024

‘हम भले होने के अभिनय से ऊब चुके हैं’

‘हम भले होने के अभिनय से ऊब चुके हैं’

तुम्हें थोड़ा-सा पिघला हुआ होना चाहिए। पिघला हुआ यानी नरम और मुलायम, ज़रा पानी-पानी-सा। दाईं आँख ने कहा।  तुम्हें थोड़ा कम झुँझलाना चाहिए। दूसरों को सुनने के दिखावटी अपार धैर्य से जन्मी खीझ को अपने दि

10 अप्रैल 2024

‘बिना शिकायत के सहना, एकमात्र सबक़ है जो हमें इस जीवन में सीखना है’

‘बिना शिकायत के सहना, एकमात्र सबक़ है जो हमें इस जीवन में सीखना है’

जैसलमेर 10 मई 2023  आज जैसलमेर आया हूँ। अपनी भुआ के यहाँ। बचपन में यहाँ कुछ अधिक आना होता था। अब उतना नहीं रहा। दुपहर में साथी के साथ हमीरा जाना हुआ। दिवंगत साकर ख़ान के घर। जीवन में लय का बहुत मह