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भोजपुरी पर ग़ज़लें

आदमी अब हो गइल

कृष्णानन्द कृष्ण

आँख उनकर आज

कृष्णानन्द कृष्ण

उठ गइल बा

ए. कुमार ‘आँसू’

कबो झील तितली

जौहर शफियाबादी

आदमी के देख के

कृष्णानन्द कृष्ण

साध-सपना हिया

ए. कुमार ‘आँसू’

जेने उनकर नजर

कृष्णानन्द कृष्ण

बस दू दिन

ए. कुमार ‘आँसू’

बात कुछ बनत

कृष्णानन्द कृष्ण

उठ रहल केकर

कृष्णानन्द कृष्ण

लाज नाहीं शरम

कृष्णानन्द कृष्ण

आदमी जानवर बन

ए. कुमार ‘आँसू’

गाँव जे शहर

कृष्णानन्द कृष्ण

आदमी के का भरोसा

कृष्णानन्द कृष्ण

कुछ कहल ना

अशोक द्विवेदी

घटी का, बढ़ल

गहबर गोवर्द्धन

नैनन से आँसू

ए. कुमार ‘आँसू’

तपी सूरज बहुत

अशोक द्विवेदी

जिन्दगी के सुख

ए. कुमार ‘आँसू’

आदमीयत के धरम

ए. कुमार ‘आँसू’

बह रहल बा

ए. कुमार ‘आँसू’

गढ़ाइल जे रहे मुरत

कृष्णानन्द कृष्ण

तन के तितली

जौहर शफियाबादी

काहे उनका अभी

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

सफर में गर

अशोक द्विवेदी

राजा के रंक

अशोक द्विवेदी

चढ़ल बसन्त में

अशोक द्विवेदी

उमड़ल नदी के धार

जौहर शफियाबादी

छोड़ दीं, चलके कहीं से कहीं ले आए दीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

अब गुलालो त असली

गहबर गोवर्द्धन

वक्त के मार सह रहल बानी

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

फूस के छप्पर

तैयब हुसैन पीड़ित

सगरो मचल बवाल

मिथिलेश ‘गहमरी’

आम महफिल में बनिके खास रहीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

लगल बा आग

मिथिलेश ‘गहमरी’

आदमी आदमी में होखेला

जौहर शफियाबादी

चाल देशी ना

जौहर शफियाबादी

दइबा बाम भइल

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’