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भोजपुरी पर कविताएँ

आपन गाँव भेंटाते नइखे

कृष्णानन्द कृष्ण

साँच बात बोले में

कृष्णानन्द कृष्ण

अन्हरिया भागी कइसे

कृष्णानन्द कृष्ण

मन के बात

कृष्णानन्द कृष्ण

अफरा-तफरी

कृष्णानन्द कृष्ण

माया में लपटाइल

कृष्णानन्द कृष्ण

कहीं बिसराई कइसे

कृष्णानन्द कृष्ण

कबले सहब

कृष्णानन्द कृष्ण

मंगल गाई

कृष्णानन्द कृष्ण

मन के भाषा पढ़ल

कृष्णानन्द कृष्ण

कहाँ अब नेह बचल बा

कृष्णानन्द कृष्ण

लोकतंत्र बा लूटीं भाई

कृष्णानन्द कृष्ण

सॉनेट

कृष्णानन्द कृष्ण

लोकतंत्र के महापर्व

कृष्णानन्द कृष्ण

जनता चुप बा

कृष्णानन्द कृष्ण