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बेईमानी पर उद्धरण

विज्ञापनों द्वारा की गई दुनिया की व्याख्या और वास्तविक दुनिया में बहुत विरोध है।

जॉन बर्जर

जनता अच्छी तरह जानती है कि नेता भावनाओं के व्यापारी होते हैं, फिर भी उनकी बातों में जाती है।

कृष्ण कुमार

जो लोग दोनों आँखें खोले हुए देखते हैं, लेकिन वास्तव में देख नहीं पाते, उन्हीं के कारण सारी गड़बड़ी है। वे आप भी ठगे जाते हैं और दूसरों को भी ठगने से बाज़ नहीं आते।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

चोरी के माल के साथ पकड़ा हुआ चोर अब कह ही क्या सकता है?

कालिदास

चालबाज़ी का एक तरीक़ा, व्यक्तियों में निजी सफलता की पूंजीवादी भूख पैदा करना है। यह चालबाज़ी कभी सीधे-सीधे अभिजनों द्वारा की जाती है, तो कभी परोक्ष रूप से अंधलोकवादी (पॉपुलिस्ट) नेताओं द्वारा कराई जाती है।

पॉलो फ़्रेरा

इस दुनिया में उतने ही नकली और क्षुद्र गुरु हैं, जितने आसमान में तारे हैं।

शम्स तबरेज़ी

जब हम कविता की तीव्रता और ताज़गी लेते हैं और उस भावना को बनाए नहीं रख पाते, तो हम रूढ़ि अपना लेते हैं और उस भावना को खोखली श्रद्धांजलि अर्पित करने लगते हैं, जो किसी समय थी।

राजेंद्र माथुर

लेक्चर का मज़ा तो तब है जब सुननेवाले भी समझें कि यह बकवास कर रहा है और बोलनेवाला भी समझे कि मैं बकवास कर रहा हूँ। पर कुछ लेक्चर देनेवाले इतनी गंभीरता से चलते कि सुननेवाले को कभी-कभी लगता था यह आदमी अपने कथन के प्रति सचमुच ही ईमानदार है।

श्रीलाल शुक्ल

बुद्धि, कौशल, सभी का नियोजन जब से द्रोण ने एकलव्य का अँगूठा कटवाया, तब से शुरू हुआ।

दुर्गा भागवत

कहना कुछ और, करना कुछ और अर्थात् अपने ही शब्दों को गंभीरता से लेना—दूसरों को आप पर भरोसा करने के लिए प्रेरित नहीं कर सकता।

पॉलो फ़्रेरा

आज विकसित देशों में क्या काम्य है और क्या काम्य नहीं है, इसके झूठे मानक थोपकर इसे हासिल किया जा रहा है।

जॉन बर्जर
  • संबंधित विषय : देश

मानववाद पर भाषण देना और मनुष्य का निषेध करना, एक झूठ है।

पॉलो फ़्रेरा

पहिले जो विद्या; पंडितों के चित्त के क्लेश को दूर करने के निमित्त थी, कुछ दिन परे वही विद्या विषयी लोगों के विषयमुख सिद्ध करने के लिए हो गई।

भर्तृहरि

मैं स्वयं यदि कोई झूठ कहूँ तो उससे जो पाप होता है, उतना ही पाप तब भी होता है; जब मैं दूसरे को झूठ कहने में लगाता हूँ, अथवा दूसरे की किसी झूठ बात का अनुमोदन करता हूँ।

स्वामी विवेकानन्द
  • संबंधित विषय : झूठ

खाने में लोभ करने वाला कुत्ते के समान, मिथ्या बोलने वाला भंगी, छल-कपट से दूसरे को खाने वाला शव-भक्षक होता है

गुरु नानक

आस्था का बाहरी दिखावा जल्दी ही ख़त्म हो जाता है।

शम्स तबरेज़ी

पंडित का ये हाल है कि परमात्मा के भजन तो गाता है, परंतु स्वयं ज्ञान से हीन है। भजन गायन को वह रोज़ी-रोटी का साधन बनाए रखता है, समझ ऊँची नहीं हो सकी।

गुरु नानक