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रूमी

1207 - 1273

संसारप्रसिद्ध सूफ़ी कवि और रहस्यवादी संत। 'मसनवी-ए-मा’नवी', 'फ़िहि माफ़ीह' और 'दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी' उल्लेखनीय कृतियाँ।

संसारप्रसिद्ध सूफ़ी कवि और रहस्यवादी संत। 'मसनवी-ए-मा’नवी', 'फ़िहि माफ़ीह' और 'दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी' उल्लेखनीय कृतियाँ।

रूमी के उद्धरण

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चीज़ों के सही या ग़लत होने के परे एक मैदान है, मैं वहाँ तुमसे मिलूँगा।

अनुवाद : सरिता शर्मा

जब तुम टूट जाओ, तो नाचो। नाचो अगर तुमने पट्टी फाड़ दी है—लड़ाई के बीच में नाचो।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मृत्यु का दूर जाने से कोई लेना-देना नहीं है। सूरज डूबता है। चाँद डूबता है, लेकिन वे चले नहीं जाते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मैं हर साँस के साथ भक्ति के बीज बोता हूँ—मैं हृदय का किसान हूँ।

अनुवाद : सरिता शर्मा

तब तक नाचो, जब तक तुम ख़ुद को चकनाचूर कर दो।

अनुवाद : सरिता शर्मा

आत्मीय बनें, दयालु बनें। प्रेम करें।

अनुवाद : सरिता शर्मा

बुद्धि बारिश की तरह है। इसका स्रोत असीम है, लेकिन यह मौसम के अनुसार बरसती है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

आत्मा यहाँ अपने आनंद के लिए है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

सूर्य की प्रशंसा करना, अपनी आँखों की प्रशंसा करना है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

इतना छोटा होने का अभिनय करना बंद करो, तुम परमानंद में गतिमान ब्रह्मांड हो।

अनुवाद : सरिता शर्मा

कृतज्ञता आत्मा के लिए शराब है। आगे बढ़ो, नशे में डूब जाओ।

अनुवाद : सरिता शर्मा

शेर भोजन की तलाश में सबसे सुंदर लगता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

जिसे तुम बारिश मानते हो, वह बारिश नहीं है। पर्दे के पीछे कभी-कभी फ़रिश्ते रोते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

जब दुनिया आपको घुटनों के बल धकेलती है, तो आप प्रार्थना करने के लिए एकदम सही स्थिति में होते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मैंने अपना मुँह बंद कर दिया और तुमसे सौ मौन तरीकों से बात की।

अनुवाद : सरिता शर्मा

  • संबंधित विषय : मौन

तुम्हारे भीतर एक शक्ति है, जो तुम्हें जीवन देती है। उसे खोजो।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मैं जितना क़रीब जाता हूँ, उतना ही मैं देखता हूँ कि मैं कितना दूर हूँ।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मेरी आत्मा कहीं और से है, मुझे इस बात का यकीन है और मैं वहीं पहुँचने का इरादा रखता हूँ।

अनुवाद : सरिता शर्मा

ब्रह्मांड में सब कुछ तुम्हारे भीतर है, सब कुछ अपने आप से माँग लो।

अनुवाद : सरिता शर्मा

चाँद तब चमकता रहता है, जब वह रात से नहीं बचता।

अनुवाद : सरिता शर्मा

ज़िंदगी थामे रहने और छोड़ देने का संतुलन है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मैंने सीखा कि हर नश्वर मृत्यु का स्वाद चखेगा, लेकिन केवल कुछ ही जीवन का स्वाद चखेंगे।

अनुवाद : सरिता शर्मा

नास्तिकता शुष्क छिलका है जो ऊपर से विलक हो गया तो उसके नीचे धर्म का कोमल और स्वादिष्ट छिलका पाया गया।

क्या तुम नियमित रूप से अपने आपसे मिलते हो? अभी शुरू करो।

अनुवाद : सरिता शर्मा

अगर आपके दिल में रोशनी है, तो आपको अपने घर का रास्ता मिल जाएगा।

अनुवाद : सरिता शर्मा

अपनी आँखें बंद करो, प्यार करो, वहीं रहो।

अनुवाद : सरिता शर्मा

प्रेमी अंततः कहीं नहीं मिलते, वे हमेशा एक-दूसरे में होते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मैं कौन हूँ और कौन नहीं हूँ, इसको जानने में मैंने बहुत-सी चीज़ें जान ली हैं। और वह कौन है और कौन नहीं है इसी को जानने में बहुत-सी चीज़ें मैंने खो दी हैं।

आइए इस पशुवत् व्यवहार से ऊपर उठें और एक-दूसरे के प्रति दयालु बनें।

अनुवाद : सरिता शर्मा

यात्रा आपके जीवन में शक्ति और प्रेम वापस लाती है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

जब आप अपनी आत्मा से काम करते हैं; तो आप अपने भीतर एक नदी बहती हुई, एक आनंद महसूस करते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

अपने विचारों में उलझे हुए, हम हर चीज़ के बारे में चिंता करते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

दु:ख एक उपहार है, इसमें दया छिपी है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

शोक मत करो। जो कुछ तुम खोते हो, वह रूप बदल कर वापस जाता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

जब भी तुम अकेले हो; अपने आप को याद दिलाओ कि ईश्वर ने बाकी सभी को दूर भेज दिया है, ताकि केवल तुम और वह हो।

अनुवाद : सरिता शर्मा

प्रेम कभी-कभी हम पर बहुत बड़ा उपकार करना चाहता है—हमें उल्टा लटका कर सारी बकवास बाहर निकाल देता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

प्रेम की अभिव्यक्ति में तर्क शक्तिहीन है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

अब चुप हो जाओ। शब्दों को बनाने वाले को बोलने दो। उसने दरवाज़ा बनाया, उसने ताला बनाया और उसने चाबी भी बनाई।

अनुवाद : सरिता शर्मा

अंत में मैंने अपने हृदय के कोने में दृष्टि डाली। देखता क्या हूँ कि वह वहीं पर उपस्थित है। दूसरे स्थानों में व्यर्थ भटकता फिरा।

मैं यह बाल नहीं हूँ, मैं यह त्वचा नहीं हूँ—मैं वह आत्मा हूँ, जो मेरे भीतर रहती है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

प्रेमी और प्रेम अमर हैं। प्रेम के अतिरिक्त किसी अन्य वस्तु से प्रेम कर क्योंकि अन्य वस्तुओं का अस्तित्व अस्थायी है।

अगर मैं ख़ुद से प्यार करता हूँ, तो मैं तुमसे प्यार करता हूँ। अगर मैं तुमसे प्यार करता हूँ, तो मैं ख़ुद से प्यार करता हूँ।

अनुवाद : सरिता शर्मा

भेद-बुद्धि पशु की अवस्था का लक्षण है, अभेदबुद्धि मनुष्यता का।

अपने जीवन को आग लगाओ। उन लोगों की तलाश करो, जो आपकी लपटों को हवा देते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

तुम जिसे खोज रहे हो, वह तुम्हें खोज रहा है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

जो झूठ है; वह दिल को परेशान करता है, लेकिन सत्य आनंदमय शांति लाता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

पूरा ब्रह्मांड एक ही इंसान में समाया हुआ है—आप में।

अनुवाद : सरिता शर्मा

बुद्धि हमें बताती है कि हम योग्य नहीं हैं; प्रेम हमें बताता है कि हम योग्य हैं—मेरा जीवन दोनों के बीच बहता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

उन लोगों को नज़रअंदाज़ करो जो तुम्हें भयभीत और दुखी करते हैं, जो तुम्हें बीमारी और मौत की ओर वापस ले जाते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

दुनिया के बग़ीचे की कोई सीमा नहीं है—सिवाए आपके मन के।

अनुवाद : सरिता शर्मा

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