वात्स्यायन के उद्धरण
लोक की अभिरुचि के अनुसार—विविध मनोरंजक क्रीड़ा ही जिसका एकमात्र उद्देश्य हो—ऐसी गोष्ठी के साथ आचरण करता हुआ नागरक, लोक में सफलता को प्राप्त करता है।
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जो आत्मबल से युक्त है, मित्र संपत्ति से संपन्न है, जो नागरकवृत्ति से युक्त है, जो मनोभावों को समझने वाला है और देश-काल की परिस्थितियों का ज्ञाता है—वह नायक अनायास ही अलभ्या नायिका को प्राप्त कर लेता है।
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