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मैथिली पर ग़ज़लें

अहाँ जानै छी

राम चैतन्य धीरज

अवधारि बैसल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

उपहास बनल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

चुप्पी मारि बैसल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

सुनसान पांतरमे

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

ढ़ेपा जुनि फेकू

राम चैतन्य धीरज

बलिगोबना सरकार छै

राम चैतन्य धीरज

जिनगी पहाड़ भेल

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

धन्य अहाँ, धन्य अहाँ अपने ढ़कैत

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

गोलैसी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

विश्राम टा चाही

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी