Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

रूमी

1207 - 1273

संसारप्रसिद्ध सूफ़ी कवि और रहस्यवादी संत। 'मसनवी-ए-मा’नवी', 'फ़िहि माफ़ीह' और 'दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी' उल्लेखनीय कृतियाँ।

संसारप्रसिद्ध सूफ़ी कवि और रहस्यवादी संत। 'मसनवी-ए-मा’नवी', 'फ़िहि माफ़ीह' और 'दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी' उल्लेखनीय कृतियाँ।

रूमी के उद्धरण

2
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

नास्तिकता शुष्क छिलका है जो ऊपर से विलक हो गया तो उसके नीचे धर्म का कोमल और स्वादिष्ट छिलका पाया गया।

मैं कौन हूँ और कौन नहीं हूँ, इसको जानने में मैंने बहुत-सी चीज़ें जान ली हैं। और वह कौन है और कौन नहीं है इसी को जानने में बहुत-सी चीज़ें मैंने खो दी हैं।

भेद-बुद्धि पशु की अवस्था का लक्षण है, अभेदबुद्धि मनुष्यता का।

आप केवल हृदय से ही आकाश को छू सकते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

जो मायने रखता है, वह यह है कि आप अपनी आत्मा के निर्देशानुसार कितनी जल्दी करते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

प्रेमियो! संसार से चल देने का समय निकट है। मेरे प्राणों को आकाश में बजने वाले कूच के नक़्क़ारे का शब्द सुनाई पड़ रहा है।

अंत में मैंने अपने हृदय के कोने में दृष्टि डाली। देखता क्या हूँ कि वह वहीं पर उपस्थित है। दूसरे स्थानों में व्यर्थ भटकता फिरा।

प्रेमी और प्रेम अमर हैं। प्रेम के अतिरिक्त किसी अन्य वस्तु से प्रेम कर क्योंकि अन्य वस्तुओं का अस्तित्व अस्थायी है।

आप सागर में बूँद नहीं है, आप बूँद में पूरा सागर हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

पशु में भेद का भाव और मनुष्य में एक का ही भाव रहता है।

तू मिट्टी था पर अब हृदय के रूप में परिणत हो गया है। तू मूर्ख था परंतु अब बुद्धिमान हो गया है। जिसने तुझे ऐसा बना दिया है, वही तुझे उस प्रकार उधर भी ले जाएगा।

जैसे ही आप रास्ते पर चलना शुरू करते हैं, रास्ता दिखाई देने लगता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

प्रेम के मार्ग में चतुराई बहुत बुरी चीज़ है।

तृषित पुरुष यदि संसार में जल की खोज करते हैं तों जल भी इस संसार में तृषितों की खोज में रहता है।

आपके हृदय में एक मोमबत्ती है, जो जलने के लिए तैयार है। आपकी आत्मा में एक शून्य है, जो भरने के लिए तैयार है। आप इसे महसूस करते हैं, है न?

अनुवाद : सरिता शर्मा

दूब के समान हम हजारों बार उगे हैं और उगते रहेंगे। हमने सात सौ सत्तर शरीर बदले हैं, और बदलते रहेंगे।

मौन को जीवन के मूल तक ले जाने दें।

अनुवाद : सरिता शर्मा

प्रेम आपके और हर चीज़ के बीच का पुल है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

अपने सबसे बुरे पलों में, बिना किसी डर के इंतज़ार करो।

अनुवाद : सरिता शर्मा

तू व्यर्थ पुस्तकों में ज्ञान ढूँढ़ता है अर्थात् छिलकों के हलवे में आनंद ढूँढ़ता है।

मौन रहें, क्योंकि मौन की दुनिया विशाल परिपूर्णता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

यह आपका रास्ता है और केवल आपका। दूसरे लोग आपके साथ चल सकते हैं, लेकिन कोई भी आपके लिए नहीं चल सकता।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मौन को अपनी कला बना लें।

अनुवाद : सरिता शर्मा

हम अपने भीतर वही चमत्कार रखते हैं, जो हम बाहर खोजते हैं।

अनुवाद : सरिता शर्मा

आप जहाँ भी हों और जो भी करें, प्रेम करें।

अनुवाद : सरिता शर्मा

आपका हृदय रास्ता जानता है। उस दिशा में दौड़ें।

अनुवाद : सरिता शर्मा

  • संबंधित विषय : दिल

प्रेम के कारण कड़वी वस्तुएं मोठी हो जाती हैं। प्रेम के स्वभाव के कारण ताँबा सोना बन जाता है।

हे मनुष्य! बुद्धि, उपाय और ज्ञान यह सब तेरे दास हैं। फिर तू स्वयं को इतना सस्ते में किसलिए बेचता है?

यदि खोटे सिक्के के सदृश नहीं है तो स्वच्छ हृदय प्राप्त कर। यदि तेरे कान में मोती नहीं है तो उस सिक्के को कान में धारण कर ले।

  • संबंधित विषय : दिल

मैं प्रेम का प्याला पीकर मस्त हो रहा हूँ। दोनों संसारों को त्याग चुका हूँ। भिक्षा और निर्धनता के अतिरिक्त मेरे पास कोई वस्तु नहीं है।

प्रेम से रोग स्वास्थ्य बन जाता है। प्रेम ही से को क्रोध दया बन जाता है।

मैं वह तीर खाने वाला हूँ कि बेतीर लगे मेरे शरीर को चैन नहीं मिलता। मैं तो प्रेमी हूँ और ज़ख़्म खा-खाकर अकड़ा करता हूँ।

एक पेड़ की तरह बनें और सूखे पत्तों को गिरने दें।

अनुवाद : सरिता शर्मा

मैंने द्वैत के आवरण को अपने अंदर से निकाल दिया है। दोनों संसारों (नश्वर जगत् अविनाशी जगत्) को मैं एक ही जानता हूँ। मैं एक ही को ढूँढ़ता हूँ और उसी को जानता हूँ। वही एक मेरी दृष्टि में है और वही एक मेरे हृदय में है।

वही आदि है और वही अंत है। वही प्रकट है और वही अदृश्य है। जो बाहर है और जो मेरे अंदर है, उसके अतिरिक्त और किसी को मैं नहीं जानता।

Recitation