रूमी के उद्धरण
जब तुम टूट जाओ, तो नाचो। नाचो अगर तुमने पट्टी फाड़ दी है—लड़ाई के बीच में नाचो।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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मृत्यु का दूर जाने से कोई लेना-देना नहीं है। सूरज डूबता है। चाँद डूबता है, लेकिन वे चले नहीं जाते हैं।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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मैं हर साँस के साथ भक्ति के बीज बोता हूँ—मैं हृदय का किसान हूँ।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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चीज़ों के सही या ग़लत होने के परे एक मैदान है, मैं वहाँ तुमसे मिलूँगा।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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कृतज्ञता आत्मा के लिए शराब है। आगे बढ़ो, नशे में डूब जाओ।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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जिसे तुम बारिश मानते हो, वह बारिश नहीं है। पर्दे के पीछे कभी-कभी फ़रिश्ते रोते हैं।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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जब दुनिया आपको घुटनों के बल धकेलती है, तो आप प्रार्थना करने के लिए एकदम सही स्थिति में होते हैं।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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बुद्धि बारिश की तरह है। इसका स्रोत असीम है, लेकिन यह मौसम के अनुसार बरसती है।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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संबंधित विषय : जीवन
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इतना छोटा होने का अभिनय करना बंद करो, तुम परमानंद में गतिमान ब्रह्मांड हो।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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मैं जितना क़रीब जाता हूँ, उतना ही मैं देखता हूँ कि मैं कितना दूर हूँ।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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मेरी आत्मा कहीं और से है, मुझे इस बात का यकीन है और मैं वहीं पहुँचने का इरादा रखता हूँ।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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संबंधित विषय : आत्मा
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ब्रह्मांड में सब कुछ तुम्हारे भीतर है, सब कुछ अपने आप से माँग लो।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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मैंने अपना मुँह बंद कर दिया और तुमसे सौ मौन तरीकों से बात की।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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तुम्हारे भीतर एक शक्ति है, जो तुम्हें जीवन देती है। उसे खोजो।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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मैंने सीखा कि हर नश्वर मृत्यु का स्वाद चखेगा, लेकिन केवल कुछ ही जीवन का स्वाद चखेंगे।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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नास्तिकता शुष्क छिलका है जो ऊपर से विलक हो गया तो उसके नीचे धर्म का कोमल और स्वादिष्ट छिलका पाया गया।
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क्या तुम नियमित रूप से अपने आपसे मिलते हो? अभी शुरू करो।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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प्रेमी अंततः कहीं नहीं मिलते, वे हमेशा एक-दूसरे में होते हैं।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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आइए इस पशुवत् व्यवहार से ऊपर उठें और एक-दूसरे के प्रति दयालु बनें।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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मैं कौन हूँ और कौन नहीं हूँ, इसको जानने में मैंने बहुत-सी चीज़ें जान ली हैं। और वह कौन है और कौन नहीं है इसी को जानने में बहुत-सी चीज़ें मैंने खो दी हैं।
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जब आप अपनी आत्मा से काम करते हैं; तो आप अपने भीतर एक नदी बहती हुई, एक आनंद महसूस करते हैं।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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अपने विचारों में उलझे हुए, हम हर चीज़ के बारे में चिंता करते हैं।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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शोक मत करो। जो कुछ तुम खोते हो, वह रूप बदल कर वापस आ जाता है।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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ओ प्रेमियो! संसार से चल देने का समय निकट है। मेरे प्राणों को आकाश में बजने वाले कूच के नक़्क़ारे का शब्द सुनाई पड़ रहा है।
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जो भी हो, बस मुस्कुराते रहो और अपने आप को प्यार में खो जाने दो।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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जो तुम्हें दु:ख देता है, वह तुम्हें आशीर्वाद देता है—अंधकार तुम्हारी मोमबत्ती है।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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उस ज्ञान की तलाश करो, जो तुम्हारी गाँठ को खोल देगा। उस मार्ग की तलाश करो, जो तुम्हारे पूरे अस्तित्व की माँग करता है।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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ऊपर देखने से रोशनी मिलती है, हालाँकि पहले तो आपको चक्कर आता है।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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मैं किसी धर्म से नहीं हूँ, मेरा धर्म प्रेम है। हर दिल मेरा मंदिर है।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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तू मिट्टी था पर अब हृदय के रूप में परिणत हो गया है। तू मूर्ख था परंतु अब बुद्धिमान हो गया है। जिसने तुझे ऐसा बना दिया है, वही तुझे उस प्रकार उधर भी ले जाएगा।
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जैसे ही आप रास्ते पर चलना शुरू करते हैं, रास्ता दिखाई देने लगता है।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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भेद-बुद्धि पशु की अवस्था का लक्षण है, अभेदबुद्धि मनुष्यता का।
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संबंधित विषय : मनुष्य
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अपने जीवन को आग लगाओ। उन लोगों की तलाश करो, जो आपकी लपटों को हवा देते हैं।
अनुवाद : सरिता शर्मा
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