अविश्वासी हो रहे हो प्रेम!
मैं अब किसी से प्रेम नहीं कर पाती हूँ। मैं इसे समझ पा रही हूँ कि मैं क्यों किसी से प्यार नहीं कर पा रही हूँ, लेकिन लोग इ
अथ सुचित्रा कथा! जिसे कथाकार पूरा न कह सका...
‘‘अगर तुम किसी के लिए अच्छा नहीं कह सकते, तो कुछ भी मत कहना...’’ अज्ञात-काया में जाने किस तरह की रोशनी होती है। इन दि
ये बोझ कोई मज़हब नहीं उठा सकता
अगर कोहाट में तब दंगे न हुए होते तो कमले की ससुराल वहीं होती, रावलपिंडी नहीं। रहीम ख़ान उन दिनों वहीं था। सब उसका आँखों द