शरद पर कविताएँ

‘शरद’ छह ऋतुओं में से

एक है। यह शीतारंभ का सूचक है, जब पावस की उमस के बाद मौसम पुनः नम्र होने लगता है। शरद की चाँदनी रातें बेहद मोहक होती हैं। इस चयन में शरद के अवलंब से व्यक्त कविताओं को शामिल किया गया है।

आते हैं

पंकज चतुर्वेदी

काम-प्रेम

वीरेन डंगवाल

शरद की रातें

आलोकधन्वा

शरद सगाई

अखिलेश सिंह

मरीचिका है यह शहर

ज्याेति शोभा

ये शरद की रातें हैं

शिरीष कुमार मौर्य

शरद का गीत

एकांत श्रीवास्तव

अमृतपान

सुधांशु फ़िरदौस

शरद की सुबह

विवेक चतुर्वेदी

शारदीया

रामविलास शर्मा

अयाचित झोंका

विजय देव नारायण साही

शरद पूर्णिमा की रात

कुशाग्र अद्वैत

स्पृहणीय चंद्रमा

मदन वात्स्यायन