यात्रा पर कविताएँ

यात्राएँ जीवन के अनुभवों

के विस्तार के साथ मानव के बौद्धिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। स्वयं जीवन को भी एक यात्रा कहा गया है। प्राचीन समय से ही कवि और मनीषी यात्राओं को महत्त्व देते रहे हैं। ऐतरेय ब्राह्मण में ध्वनित ‘चरैवेति चरैवेति’ या पंचतंत्र में अभिव्यक्त ‘पर्यटन् पृथिवीं सर्वां, गुणान्वेषणतत्परः’ (जो गुणों की खोज में अग्रसर हैं, वे संपूर्ण पृथ्वी का भ्रमण करते हैं) इसी की पुष्टि है। यहाँ प्रस्तुत है—यात्रा के विविध आयामों को साकार करती कविताओं का एक व्यापक और विशेष चयन।

अंतिम ऊँचाई

कुँवर नारायण

ज़रूर जाऊँगा कलकत्ता

जितेंद्र श्रीवास्तव

2020 में गाँव की ओर

विष्णु नागर

या

सौरभ अनंत

2020

संजय चतुर्वेदी

ओ मेरी मृत्यु!

सपना भट्ट

इलाहाबाद

संदीप तिवारी

याद

कैलाश वाजपेयी

सात दिन का सफ़र

मंगलेश डबराल

त्रा

सौरभ अनंत

पूर्वजन्म

राजेंद्र धोड़पकर

पहुँचने के लिए

रामकुमार तिवारी

भेजना

त्रिभुवन

स्वप्न

सौरभ अनंत

मुलाक़ातें

आलोकधन्वा

संतुलन

सौरभ राय

होना

सुघोष मिश्र

नमक पर यक़ीन ठीक नहीं

नवीन रांगियाल

आलोकधन्वा के लिए

ज्याेति शोभा

हमसफ़र

सुधांशु फ़िरदौस

उड़ते हुए

वेणु गोपाल

अनागत

देवी प्रसाद मिश्र

बंजारे

निधीश त्यागी

अकेले ही नहीं

कृष्णमोहन झा

एक रात का सफ़र

शुभम् आमेटा

देना

नवीन सागर

किताब

सौरभ अनंत

ट्राम में एक याद

ज्ञानेंद्रपति

नदी

अखिलेश सिंह

आवाज़ तेरी है

राजेंद्र यादव

सफ़र

निलय उपाध्याय

साइकिल

बद्री नारायण

अभी हूँ

अनाम कवि

लयबद्ध

कैलाश वाजपेयी

यात्रा

अरुण कमल