अंतरिक्ष पर कविताएँ

अंतरिक्ष का मूल अर्थ

पृथ्वी और द्युलोक के मध्य का स्थान है। इस अर्थ के साथ ही बाह्य और अंतर-संसार में बीच की जगह, दूरी, मन के रिक्त स्थान, विशालता जैसे तमाम अर्थों में यह शब्द कविता में अपना अंतरिक्ष रचता रहा है।

अनुवाद

अनामिका

धूल की जगह

महेश वर्मा

अ-उपस्थित

प्रकाश

ग्रह

अरुण कमल

ब्लैकहोल

उद्भ्रांत

सन्नयास

मुकुंद लाठ

नए को दो जगह

प्रयाग शुक्ल

अंतरिक्ष की राख

मनीषा कुलश्रेष्ठ

गुरुत्व

संतोष कुमार चतुर्वेदी