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जॉन स्टुअर्ट मिल

1806 - 1873 | लंदन

प्रसिद्ध दार्शनिक, अर्थशास्त्री और राजनीतिक विचारक।

प्रसिद्ध दार्शनिक, अर्थशास्त्री और राजनीतिक विचारक।

जॉन स्टुअर्ट मिल के उद्धरण

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किसी भी इंसान की ख़ुशी के लिए यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि उसे अपनी स्वाभाविक इच्छाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने की स्वतंत्रता हो।

अनुवाद : युगांक धीर

मानसिक श्रेष्ठता, आम मामलों में या किन्हीं ख़ास मामलों में और चरित्र की दृढ़ता—हमेशा अपना डंका बजवाकर रहेंगी।

अनुवाद : युगांक धीर

पुरुष अगर अपनी पूरी सत्ता का इस्तेमाल करता है तो स्त्री निसंदेह कुचली जाती है, पर अगर वह भरपूर लाड़-प्यार में सत्ता स्त्री के हाथों में सौंप देता है, तो स्त्री द्वारा अधिकारों की अतिक्रमण की कोई सीमा नहीं रहती।

अनुवाद : युगांक धीर

आधुनिक सभ्यता और शिक्षा ने मानवीय विकास में जो भूमिका निभाई है; वह तब तक अधूरी और अपूर्ण ही रहेगी, जब तक कि ताक़त के क़ानून वाली पुरानी सभ्यता के गढ़ पर हमला नहीं किया जाता। और वह गढ़—गृहस्थ और दांपत्य-जीवन है।

अनुवाद : युगांक धीर

दूसरे सभी क्षेत्रों में मनुष्य द्वारा किया जा रहा विकास; दुनिया को जिस तरफ़ ले जा रहा है, उसके लिए मनुष्य की नैतिक तैयारी अभी के बराबर है।

अनुवाद : युगांक धीर

एक सफल विवाह में ऐसा कभी नहीं होता कि सभी अधिकार सिर्फ़ एक तरफ़ हैं, और सारी आज्ञाकारिता दूसरी तरफ। अगर कहीं ऐसा है तो वह एक असफल विवाह है और उससे दोनों को ही मुक्ति मिलनी चाहिए।

अनुवाद : युगांक धीर

मानवीय चरित्र की सभी कुरूपताओं के दर्शन करने हो, तो वरिष्ठ पदाधिकारियों का अपने अधीनस्थों के साथ व्यवहार देख लेना चाहिए।

अनुवाद : युगांक धीर

स्त्रियों को पुरुषों के साथ खुली प्रतियोगिता करने देना, अन्यायपूर्ण और एक तरह का सामाजिक अपराध है।

अनुवाद : युगांक धीर

आम स्त्रियों में पाई जाने वाली विशिष्ट प्रवृत्तियाँ और चारित्रिक दुरूहताएँ उन हालात का परिणाम होती हैं, जिनमें उनका पालन-पोषण होता है—ये प्राकृतिक क़तई नहीं होतीं।

अनुवाद : युगांक धीर

हमें उन पुरुषों की भावनाओं का सुराग़ भी मिल जाता है, जो स्त्रियों की समान स्वतंत्रता के नाम से चिढ़ते हैं। मेरे ख़्याल में उन्हें डर लगता है, इस बात से नहीं कि स्त्रियाँ विवाह से इन्कार कर देंगी—क्योंकि मुझे नहीं लगता कोई सचमुच ऐसा सोचेगा, बल्कि इस बात से कि वे चाहेंगी कि विवाह बराबरी की शर्तों पर तय हो।

अनुवाद : युगांक धीर

मेरा विश्वास है कि अधिकारों की समानता के बाद; स्त्री की आत्म-आहुति का बढ़ा-चढ़ाकर बनाया गया मिथक ज़मीन पर उतरेगा, और तब एक श्रेष्ठ स्त्री श्रेष्ठतम पुरुष से ज़्यादा त्यागमयी नहीं होगी, पर साथ ही तब पुरुष भी आज की तुलना में ज़्यादा निस्वार्थ और आत्म-त्यागी होंगे, क्योंकि उन्हें बचपन से यह नहीं सिखाया जाएगा कि उनकी ज़िद दूसरों के लिए क़ानून के समान है।

अनुवाद : युगांक धीर

कोई भी इस बात का दावा नहीं कर सकता कि अगर स्त्रियों की प्रकृति को सहज रूप से विकसित होने दिया जाता, अगर उसे एक बनावटी स्वरूप देने के प्रयास किए गए होते—तो भी स्त्री और पुरुष के चरित्र और क्षमता में कोई व्यावहारिक अंतर, या शायद कुछ भी अंतर होता।

अनुवाद : युगांक धीर

मानव-स्वभाव की कुरूपताएँ तभी तक मर्यादा में रहती हैं, जब तक उनके सामने कोई सीमा-रेखा खिंची हो।

अनुवाद : युगांक धीर

मध्य-युग के जीवन की हल्की-सी समझ भी यह बताती है कि निर्बलों की पराधीनता को कितना प्राकृतिक समझा जाता था, और उनमें से किसी की समानता की इच्छा को कितना अप्राकृतिक।

अनुवाद : युगांक धीर

अगर कोई हिंदू रियासत शक्तिशाली, न्यायपूर्ण और आर्थिक रूप से ठोस होती थी; अगर बिना दमनकारी नीतियों के क़ानून और व्यवस्था बरक़रार रहती थी और अगर कृषि-क्षेत्र प्रगति पर और आम लोग संपन्न होते थे—तो चार में से तीन संभावनाएँ थीं कि उस रियासत पर किसी स्त्री का शासन हो।

अनुवाद : युगांक धीर

जिसे आज 'स्त्री का स्वभाव' कहा जाता है, वह एक नक़ली चीज़ है और कुछ दिशाओं में बाध्यतापूर्ण दमन, और कुछ दिशाओं में अप्राकृतिक फैलाव का परिणाम है।

अनुवाद : युगांक धीर

कोई व्यक्ति किसी राष्ट्र या किसी समाज की स्वतंत्रता की भावना को कैसे समझ सकता है, जबकि घर में तो वह अपने बीवी-बच्चों का तानाशाह बना बैठा है।

अनुवाद : युगांक धीर

समाज में एक बड़ी संख्या अभी भी उन व्यक्तियों की है, जो अपने मूल पशुत्व और स्वार्थ पर सभ्यता का सिर्फ़ मुलम्मा चढ़ाए हुए हैं—एक दिखावटी आवरण।

अनुवाद : युगांक धीर

हम पुरुषों की वर्गीय तहों के जितना नीचे जाएँगे, उतना ही पुरुषों का 'पुरुष होने का घमंड' बढ़ता दिखेगा। और यह सबसे ज्यादा उन पुरुषों में मिलेगा, जिनमें पत्नी और बच्चों को छोड़कर और किसी पर राज करने की तो हिम्मत है, योग्यता।

अनुवाद : युगांक धीर

मैं ख़ुद इस बात का घोर समर्थक हूँ कि विवाह के बाद सभी हितों का मिलन ही एक आदर्श स्थिति है, लेकिन हितों के मिलन का अर्थ यह नहीं हुआ कि जो मेरा है, वह तुम्हारा है; पर जो तुम्हारा है, वह सिर्फ़ तुम्हारा है।

अनुवाद : युगांक धीर

कोई भी क़ानून तब तक हमारे जीवन का हिस्सा नहीं हो सकता, जब तक कि वह हमारी सोच और हमारी भावनाओं का हिस्सा हो।

अनुवाद : युगांक धीर

यह पूजा-परस्ती जो आज की सबसे झूठी पूजाओं में से एक है; शायद तब तक क़ायम रहेगी, जब तक कोई ठोस मनोविज्ञान इस 'इंस्टिंक्ट' का पर्दाफ़ाश नहीं कर देता, जिसे 'प्रकृति का इरादा' और 'ईश्वर का आदेश मान कर नतमस्तक हुआ जा रहा है।

अनुवाद : युगांक धीर

बिना किसी झिझक के यह कहा जा सकता है कि ताक़त के क़ानून के तहत जितना ज़्यादा अंतर स्त्री के मूलभूत चरित्र में आया है, उतना किसी भी दूसरे दमित वर्ग के चरित्र में नहीं आया।

अनुवाद : युगांक धीर

जो व्यक्ति किसी सत्ता के जितना ज़्यादा अयोग्य होता है, जिसे दूसरों पर किसी क़िस्म के अधिकार प्राप्त होने की जितनी कम संभावना होती है—वहीं कानून और परंपराओं का सबसे ज़्यादा दुरुपयोग करके, हाथ में आई शक्ति पर अपना क़ब्ज़ा बढ़ाने की कोशिश करता है।

अनुवाद : युगांक धीर

पृथ्वी पर एक बेहतर ज़िंदगी के मानवीय संघर्ष में, स्त्रियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता—एक प्रमुख और बहुत महत्त्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए।

अनुवाद : युगांक धीर

ऐसे किसी क़ानून की कहाँ ज़रूरत है जो एक पक्ष को राजा और दूसरे को प्रजा के कटघरे में खड़ा कर दे, और कहे कि राजा द्वारा दी जा रही सभी स्वतंत्रताएँ एक तरह का उपकार हैं, और कभी भी वापस ली जा सकती हैं।

अनुवाद : युगांक धीर

आजकल सत्ता की भाषा काफ़ी नम्र हो चली है और जिसे दबाया जाता है, उसे 'उसी के हित में' दबाया जाता है।

अनुवाद : युगांक धीर

इतिहास और अनुभव गवाह हैं कि बहुत संवेदनशील व्यक्ति, कर्तव्यपालन के मामले में बहुत दृढ़ होते हैं।

अनुवाद : युगांक धीर

अगर कोई व्यक्ति अपने बराबर वालों के साथ हिंसा से पेश आता है, तो तय मानिए कि उसे अपने से निचलों के साथ रहने की आदत है, जिन्हें वह मनमाने तरीक़े से डरा-धमका सके।

अनुवाद : युगांक धीर

स्त्रियों के प्रति किसी पुरुष के दृष्टिकोण से यह बात भी पता चलती है कि ख़ुद उसकी पत्नी कैसी है।

अनुवाद : युगांक धीर

मानव-सभ्यता में हुआ आज तक का विकास और सारी-की-सारी आधुनिक प्रवृत्तियाँ, सिर्फ़ एक ही संकेत करते हैं—यह आदिम व्यवस्था भविष्य की दुनिया से मेल नहीं खाती और इसका ख़त्म हो जाना अनिवार्य है।

अनुवाद : युगांक धीर

रोग और अपराधबोध के बाद स्वाभाविक गतिविधियों पर प्रतिबंध ही एक ऐसी चीज़ है, जो मनुष्य को जीवन के सहज आनंद से वंचित कर देती है।

अनुवाद : युगांक धीर

घर-गृहस्थी के प्रति धार्मिक कट्टरता जैसा जुड़ाव, दरअसल बाहरी दुनिया के प्रति शत्रुता का ही दूसरा नाम है—और अनजाने में ही इससे बाहरी दुनिया के नुक़सान के साथ-साथ, घर-गृहस्थी का और उन उद्देश्यों का—जिनके लिए हम जी रहे होते हैं—नुक़सान होने लगता है।

अनुवाद : युगांक धीर

सच्चाई यह है कि कोई और रास्ता देख पाने वालों को, ताक़त का क़ानून ही एकमात्र रास्ता नज़र आता है।

अनुवाद : युगांक धीर

समान अधिकारों वाले व्यक्तियों को मिला कर बनाया गया समाज ही, सच्ची नैतिक भावनाओं की पाठशाला हो सकता है।

अनुवाद : युगांक धीर

नैतिकता की असली कसौटी है, बुराई को निरुत्साहित करने की क्षमता।

अनुवाद : युगांक धीर

मानव जाति की दशा में बड़े सुधार तब तक संभव नहीं हैं, जब तक मनुष्यों की चिंतन-विधियों की मूलभूत रचना में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होता है।

अनुवाद : युगांक धीर

किसी भी सक्रिय और ऊर्जावान मस्तिष्क को अगर स्वतंत्रता से वंचित रखा जाएगा, तो वह ग़लत दिशा में विकास करेगा। वह किसी भी तरह सत्ता प्राप्त करने का प्रयास करेगा।

अनुवाद : युगांक धीर

प्रत्येक स्त्री के समय और विचारों पर व्यावहारिक होने का बहुत ज़्यादा दबाव होता है।

अनुवाद : युगांक धीर

आज हम मनुष्यों में स्वार्थ, आत्म-केंद्रिता और अन्यायपूर्ण पक्षपात के जो दोष देखते हैं, उनकी जड़ में असमान स्त्री-पुरुष संबंध ही हैं।

अनुवाद : युगांक धीर

मानवीय आचरण के आम उद्देश्य ही यह तय कर देते हैं कि कोई व्यक्ति या तो ग़लत कार्यक्षेत्र में आए ही नहीं, या उसमें ज़्यादा देर टिके नहीं।

अनुवाद : युगांक धीर

विजयी नस्लें मानती रही हैं कि पराजितों पर राज करना उनका प्रकृति प्रदत्त अधिकार है, या यह कि निर्बल और शांत नस्लों को साहसी और पराक्रमी नस्लों के आगे झुकना ही चाहिए।

अनुवाद : युगांक धीर

पुरुषों और स्त्रियों के बीच अगर कोई मानसिक अंतर है भी, तो वह उनकी शिक्षा और हालत के अंतर का स्वाभाविक परिणाम है—उसमें प्रकृति प्रदत अंतर बहुत कम है।

अनुवाद : युगांक धीर

इतिहास दिखाता है कि मनुष्य का स्वभाव बाहरी प्रभावों के कितने ज़्यादा नियंत्रण में है; और ठोस-से-ठोस समझा जाने वाला सामाजिक सत्य भी मौक़ा आने पर कैसे एक बिल्कुल दूसरा रंग अख़्तियार कर लेता है, पर इतिहास में भी यात्रा की तरह मनुष्य वही देखता है, जो वह देखना चाहता है। बहुत कम लोग इतिहास से सबक़ लेते हैं।

अनुवाद : युगांक धीर

स्त्रियों के मामले में भौतिक अधिकार ने क़ानूनी अधिकार की शक्ल नहीं ली; इस तथ्य ने और साथ ही इस मामले के सभी विशिष्ट और यौनात्मक पहलुओं ने, यह निश्चित कर दिया कि जहाँ 'सबसे ताक़तवर के अधिकार' वाली यह शाख़ा अपना बर्बर रूप सबसे पहले त्यागेगी, वहीं दूसरी तमाम शाख़ाओं के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा देर तक जीवित रहेगी।

अनुवाद : युगांक धीर

शक्तिशाली भावना; शक्तिशाली आत्मनियंत्रण को भी जन्म देती है, सिर्फ़ व्यक्ति में इसके अभ्यास की आदत होनी चाहिए।

अनुवाद : युगांक धीर

चरित्र को जल्दी भाँप लेने की क्षमता—जिस क्षेत्र में स्त्रियाँ प्रामाणिक तौर पर पुरुषों से आगे हैं—उन्हें स्वाभाविक रूप से सत्ता की योग्य अधिकारिणी बना देता है।

अनुवाद : युगांक धीर

सत्ता-प्रेम और स्वतंत्रता-प्रेम, एक-दूसरे के परस्पर विरोधी विकल्प हैं। जहाँ सबसे कम स्वतंत्रता होती है, वहाँ सत्ता का संघर्ष उतना ही ज़्यादा प्रबल और क्रूर होता है।

अनुवाद : युगांक धीर

लिंगों के बीच अधिकारों की असमानता का स्रोत कुछ और नहीं, सिर्फ़ 'सबसे ताक़तवर का क़ानून' है।

अनुवाद : युगांक धीर

अपने हितों से जुड़े मामलों में अगर व्यक्ति ख़ुद निर्णय लेता है, तो उसके सही साबित होने की सबसे ज़्यादा संभावनाएँ रहती हैं।

अनुवाद : युगांक धीर

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