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समाज पर ग़ज़लें

कुछ कहल ना

अशोक द्विवेदी

कब छाँही कब

अशोक अज्ञानी

गढ़ाइल जे रहे मुरत

कृष्णानन्द कृष्ण

देंह के रंग

मिथिलेश ‘गहमरी’

साँस पर राग

गहबर गोवर्द्धन

हर जगह बिसवास

कृष्णानन्द कृष्ण

बेवफा एह जिन्दगी

कृष्णानन्द कृष्ण

नइखे जानत के आवत बा

तैयब हुसैन पीड़ित

बालू के देवार बा, बाबा

तैयब हुसैन पीड़ित

गोलैसी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

नाक हुवै ऊँची

अशोक अज्ञानी

तबहूँ प्यासल गगरी बा

रमाकान्त मुकुल

बाढ़ आइल सिवान

मिथिलेश ‘गहमरी’

जयिसे हवा के साथ

अशोक अज्ञानी

बात होता कि सरग

अशोक द्विवेदी

काल्ह के दुख

मिथिलेश ‘गहमरी’

लगल बा आग

मिथिलेश ‘गहमरी’

आज अदिमी बिखर

ए. कुमार ‘आँसू’

चमक दमक में

अशोक द्विवेदी

मीत, जब मीत

मिथिलेश ‘गहमरी’

कतहीं चइता कतहीं

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

दोस हमरे गिनात बा

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

दरदे अबले उपहार

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

साँस के संगीत बन जाता

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

पूछत बा लोग

जौहर शफियाबादी

भेद जे भेदिया

अशोक द्विवेदी