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प्रेम पर कविताएँ

प्रेम के बारे में जहाँ

यह कहा जाता हो कि प्रेम में तो आम व्यक्ति भी कवि-शाइर हो जाता है, वहाँ प्रेम का सर्वप्रमुख काव्य-विषय होना अत्यंत नैसर्गिक है। सात सौ से अधिक काव्य-अभिव्यक्तियों का यह व्यापक और विशिष्ट चयन प्रेम के इर्द-गिर्द इतराती कविताओं से किया गया है। इनमें प्रेम के विविध पक्षों को पढ़ा-परखा जा सकता है।

तुम्हारे साथ रहकर

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

प्रेमपत्र

बद्री नारायण

प्रेमिकाएँ

अखिलेश सिंह

आत्म-मृत्यु

प्रियंका दुबे

प्रेम के आस-पास

अमर दलपुरा

प्रेमपत्र

सुधांशु फ़िरदौस

प्रेम लौटता है

गौरव गुप्ता

युवा होता बेटा

पल्लवी विनोद

या

सौरभ अनंत

कौन?

ज़ाविएर अब्रील

यह कहकर

विनोद कुमार शुक्ल

मैंने सिखा लिया अपने को

अन्ना अख्मातोवा

मेरा साथ न छोड़ना

गैब्रिएला मिस्ट्राल

एक रात द्वीप पर

पाब्लो नेरूदा

प्रभु उसे क्षमा करो

गैब्रिएला मिस्ट्राल

रात दस मिनट की होती

विनोद कुमार शुक्ल

नीली आग वाली लड़की

पाब्लो नेरूदा

सुनो चारुशीला

नरेश सक्सेना

ग्रामीण प्रणय गीत

एमिलियो वास्केज़

पिया-बोल

सावजराज

वर्षा की दुपहर

सेसर वायेखो

दीवानगी

सावजराज

अंतिम दो

अविनाश मिश्र

दीवार

तादेऊष रूज़ेविच

चंचल चित्त

पाब्लो नेरूदा

नदी और पहाड़

शिवानी कार्की

प्रेम की जगह अनिश्चित है

विनोद कुमार शुक्ल

आरर डाल

त्रिलोचन

मार्का लगाओ उन पर

येहूदा आमिखाई

एक और ढंग

श्रीकांत वर्मा

जान

बेबी शॉ

मुलाक़ातें

आलोकधन्वा

पार करना

प्रदीप सैनी