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रुत्ख़ेर ब्रेख़्मान

1988 | वेस्टर्सचौवेन

सुपरिचित इतिहासकार और लेखक। यूरोप के सर्वाधिक प्रतिष्ठित युवा विचारकों में से एक।

सुपरिचित इतिहासकार और लेखक। यूरोप के सर्वाधिक प्रतिष्ठित युवा विचारकों में से एक।

रुत्ख़ेर ब्रेख़्मान के उद्धरण

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अगर हम अपने समय की सबसे बड़ी चुनौतियों—जलवायु के संकट से लेकर एक-दूसरे के प्रति हमारे उत्तरोत्तर बढ़ते जा रहे आविश्वास तक—से निपटना चाहते हैं, तो मुझे लगता है कि इसकी शुरुआत हमें मनुष्य के स्वभाव के बारे में, अपने दृष्टिकोण को बदलने के साथ करने की ज़रूरत है।

अनुवाद : मदन सोनी

जब संकट आता है, जब बम गिरते हैं या बाढ़ आती है—तभी हम मनुष्य अपने श्रेष्ठतम रूप में प्रकट होते हैं।

अनुवाद : मदन सोनी

मीडिया का आधुनिक उन्माद नीरसता पर भीषण हमला है, क्योंकि हमें ईमानदारी के साथ स्वीकार करना चाहिए कि ज़यादातार लोगों के जीवन ऐसे हैं, जिनका आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है।

अनुवाद : मदन सोनी

कुछ हासिल करने की लालसा रखने वाले किसी भी आदमी के लिए, झूठ और छल का एक जाल बुनना सबसे ज़्यादा कारगर होता है।

अनुवाद : मदन सोनी

इतिहास में कभी भी किसी गिलहरी ने; अपने साथी जीवों की समूची प्रजाति को गिनने, बंदी बनाने और नेस्तनाबूद करने की प्रेरणा महसूस नहीं की। ये अपराध अद्वितीय रूप से मनुष्य द्वारा किए जाते हैं।

अनुवाद : मदन सोनी

विनाश-लीलाएँ लोगों के श्रेष्ठतम पक्ष को सामने ले आती हैं।

मीडिया हमारे दिमाग़ में जो तस्वीर तैयार करता रहता है; वह निरंतर उन घटनाओं के विपरीत होती है, जो आपदा की घड़ियों में घटित होती है।

अगर आप किसी चीज़ में पर्याप्त यक़ीन करने लगते हैं, तो वह चीज़ वास्तविक हो सकती है।

अनुवाद : मदन सोनी

बहुत ज़्यादा डर आपकी जान नहीं लेगा। बहुत कम डर निश्चय ही आपकी जान ले लेगा।

अनुवाद : मदन सोनी

ज़्यादातर लोग अंदर से बहुत भले होते है।

अनुवाद : मदन सोनी

हम वह हैं, जिस पर हम विश्वास करते हैं। हमें वही मिलता है, जिसकी हमें तलाश होती है और हम जो पूर्वानुमान करते हैं, वही होता है।

अनुवाद : मदन सोनी

मानव-स्वभाव के प्रति आशावादी दृष्टिकोण, ताक़तवर लोगों के लिए पूरी तरह से डरावना होता है—विनाशकारी, बग़ावती।

अनुवाद : मदन सोनी

दूसरे लोगों के बारे में हम जितना भी जानते हैं, उसका ज़्यादातार हिस्सा उस मीडिया के माध्यम से और उन पत्रकारों के माध्यम से हम तक पहुँचता बात है कि हम अजनबियों के प्रति इतने शंकालु हो गए? क्या अपिचित के प्रति हमारा विकर्षण, एक टिक-टिक करते टाइम बम जैसा हो सकता है?

अनुवाद : मदन सोनी

इस दुनिया का मंत्र है—जो बेशर्म होता है, जीवित बचा रहता है।

अनुवाद : मदन सोनी

हम फ़रिश्ते नहीं है। हम जटिल या संशिलष्ट जीव हैं, जिनका एक पक्ष अच्छा भी है और एक पक्ष उतना अच्छा नहीं भी है।

तानाशाह और आततायी, शासक और सेनापति, ये सब उन स्थितियों को रोकने के लिए—जिनका वजूद सिर्फ़ उन्हीं के दिमाग़ों में होता है—अक्सर क्रूर शक्त्तियों का इस्तेमाल करते हैं, यह मान कर कि औसत कमकाजी आदमी, उन्हीं की तरह अपने स्वार्थ से परिचालित होता है।

अनुवाद : मदन सोनी

झूठ बोलने में उससे ज़्यादा संज्ञानात्मक ऊर्जा लगती है, जितनी सत्यनिष्ठ बने रहने में लगती है। इसीलिए हमारे मस्तिष्क उस तरह विकसित होते रहे हैं, जैसे शीत युद्ध के दौरान रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका के परमाणु शस्त्रागार विकसित हुए थे। सेपियंस का महामस्तिष्क, मानसिक हथियारों की इसी होड़ का नतीजा है।

अनुवाद : मदन सोनी

जिस तरह परानुभूति विशिष्ट को केंद्र में लाकर हमें गुमराह करती है, उसी तरह समाचार असामान्य को केंद्र में लाकर हमें छलता है।

अनुवाद : मदन सोनी

ऐसे विचार बहुत कम है, जिनमें दुनिया को शक्ल देने की वैसी ताक़त है, जैसी दूसरे लोगों के बारे में हमारे दृष्टिकोण में होती है। क्योंकि अंततः आपको वही हासिल होता है, जिसे हासिल करने की आपने उम्मीद की होती है।

अनुवाद : मदन सोनी

जीवन के विकास के लिए आवश्यक बुनियादी घटक एकदम स्पष्ट हैं। आपको इन चीज़ों की ज़रूरत है—बहुत-सा दुःख, बहुत-सा संघर्ष, बहुत-सा समय।

अनुवाद : मदन सोनी

सत्ता एक नशीले पदार्थ की तरह होती है—एक ऐसा नशीला पदार्थ, जिसके साइड इफे़क्ट्स की एक पूरी-की-पूरी फ़ेहरिस्त है।

अनुवाद : मदन सोनी

जैसे ही आप शिखर पर पहुँचते हैं, वैसे ही चीज़ों को दूसरों के नज़रियों से देखने की प्रेरणा कम हो जाती है। संवेदना की कोई अनिवार्यता नहीं रह जाती, क्योंकि जिस किसी को भी आप विवेकहीन या चिढ़ पैदा करने वाला पाते हैं; उसकी आसानी से उपेक्षा की जा सकती है, उसे दंडित किया जा सकता है।

अनुवाद : मदन सोनी

ज़्यादातार पुस्तकें अपवादों के बारे में होती हैं।

अनुवाद : मदन सोनी

उम्मीद की वजह हमेशा तात्कालिक होती हैं।

अनुवाद : मदन सोनी

जहाँ आधुनिक युग के अभिभावक; अपने बच्चों को अजनबियों से बात करने की चेतावनी देते हैं, वहीं प्रागैतिहास में हमारा पोषण विश्वास की ख़ुराक से होता था।

अनुवाद : मदन सोनी

पारंपरिक तौर पर सत्ता का बँटवारा जिस तरह होता रहा है, उसकी वजह से पुरुषों को समझने की ज़िम्मेदारी ज़्यादातार स्त्रियों पर रही है। स्त्री की उत्कृष्ट सहज बुद्धि की जो धारणाएँ निरंतर बनी रही हैं, उनकी जड़ें भी शायद इसी असंतुलन में हैं। स्त्री से अपेक्षा की जाती है कि वह चीज़ों को पुरुष के नज़रिए से देखें, जबकि इससे उलट अपेक्षा शायद ही कभी की जाती है।

अनुवाद : मदन सोनी

आपदाएँ हमारे भीतर के श्रेष्ठतम पक्ष को बाहर ले आती हैं। मानो वे एक सामूहिक रीसेट बटन को दबा देती हैं, हम अपने बेहतर स्वत्वों के साथ सक्रिय हो जाते हैं।

अनुवाद : मदन सोनी

कुछ सच्चाइयाँ इतनी दर्दनाक होती हैं कि उनको स्वीकार करना बहुत तकलीफ़देह होता है।

अनुवाद : मदन सोनी

लोग सामाजिक प्राणी हैं, लेकिन हम में एक घातक खोट है। हम उनके प्रति ज़्यादा लगाव अनुभव करते हैं, जो सबसे अधिक हमारी तरह होते हैं।

अनुवाद : मदन सोनी

साध्य जीतना है, साधन चाहे कैसा भी हो, उचित या अनुचित, लेकिन अगर बेशर्मों की ही जीत होती है, तो फिर ऐसा क्यों है कि समूचे प्राणी-जगत में सिर्फ़ मनुष्य ही शर्म से लाल होते हैं?

अनुवाद : मदन सोनी

अगर हमारे भीतर छिपे हुए शिकारी को कोई चीज़ सामने ले आती है, तो वह युद्ध है। युद्ध ही वह अवसर है, जब हम हत्या करने के लिए गोली दागते हैं।

अनुवाद : मदन सोनी

मनुष्य भय से परिचालित होते हैं।

अनुवाद : मदन सोनी

अराजकता को क़ाबू किया जा सकता है और शांति स्थापित की जा सकती है—बशर्ते कि हम अपनी आज़ादी को त्यागने के लिए तैयार हों।

अनुवाद : मदन सोनी

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