मीडिया का आधुनिक उन्माद नीरसता पर भीषण हमला है, क्योंकि हमें ईमानदारी के साथ स्वीकार करना चाहिए कि ज़यादातार लोगों के जीवन ऐसे हैं, जिनका आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है।
मीडिया हमारे दिमाग़ में जो तस्वीर तैयार करता रहता है; वह निरंतर उन घटनाओं के विपरीत होती है, जो आपदा की घड़ियों में घटित होती है।
आधुनिक हिंदी के निर्माण में पत्रकारिता का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है, पर आज पत्रकारिता हिंदी को प्रतिदिन क्षत-विक्षत करने की मुहिम बन गई है।