डर के साथ झूठ और औचित्य भी आते हैं, जो चाहे कितने भी विश्वसनीय क्यों न हों; हमारे आत्म-सम्मान को कम कर देते हैं।
आप अपनी आंतरिक शक्ति का जितना ज़्यादा इस्तेमाल करेंगे, उतनी ही ज़्यादा शक्ति को अपनी ओर आकर्षित करेंगे।
-
संबंधित विषय : आत्म-चिंतनऔर 1 अन्य
आत्मज्ञान, कार्यों का सभारंभ, तितिक्षा, धर्म में स्थिरता—ये सब गुण जिसको उद्देश्य से दूर नहीं हटाते, उसी को पंडित कहा जाता है।
बुद्धत्व का आगमन किसी नेता या गुरु द्वारा नहीं होता, आपके भीतर जो कुछ है उसकी समझ द्वारा ही इसका आगमन होता है।
-
संबंधित विषय : आत्म-चिंतनऔर 2 अन्य
हम अपने ऊपर राज करें वही स्वराज्य है और वह स्वराज्य हमारी हथेली में है।
आप बिना किसी पुस्तक को पढ़े या बिना साधु—संतों और विद्वानों को सुने अपने मन का अवलोकन कर सकते हैं।
-
संबंधित विषय : आत्म-अनुशासनऔर 2 अन्य
ख़ुद की तलाश का रास्ता हमेशा परेशानियों और अनिश्चितताओं से ही भरा रहता है।
आत्मस्वरूप को भूलकर जो अहंभाव उठता है वही अहंकार है, जो विकार से त्रिगुण को क्षुब्ध करता है।
आत्म-मूल्य को बढ़ाने के लिए आपको अपने जीवन में लगातार मूल्य जोड़ते रहना होगा।
ख़ुद से झूठ बोलना बंद कर दीजिए तो आपके सामने सच का अगाध सागर होगा और आपके लिए मुक्ति के द्वार खुल जाएँगे।
-
संबंधित विषय : आत्म-अनुशासनऔर 1 अन्य
अंततः सबसे अच्छी क़िस्मत वह होती है, जिसे आप ख़ुद बनाते हैं।
-
संबंधित विषय : आत्मविश्वासऔर 1 अन्य
आपके पास ऐसा मन होना चाहिए जो पूर्णतः: अकेले होने में समर्थ हो, तथा जो दूसरे व्यक्तियों के अनुभवों और प्रचार से बोझिल न हो।
तुम सच्ची दोस्ती, असली जुड़ाव, अडिग प्रेम के हकदार हो और जब तुम उसे चुनते हो तो दुनिया बदल जाती है।
-
संबंधित विषय : आत्मविश्वास
आत्म-प्रेम के बारे में बहुत कुछ कहा गया है, लेकिन चलिए इसे स्पष्ट करते हैं:- ये स्वार्थ नहीं है, ये ठीक उसका उल्टा है।
जो व्यक्ति स्वयं को कीड़ा बना ले; वह बाद में शिकायत नहीं कर सकता, यदि लोग उस पर पैर रख दें।
उन लोगों के लिए बार-बार उपलब्ध होना बंद करो, जिन्हें तुम्हारे होने में कोई दिलचस्पी नहीं।
जितना ज़्यादा तुम ख़ुद को उस भूमिका में फ़िट करने की कोशिश करते हो, उतना ही तुम उन रिश्तों और उस समुदाय से दूर होते हो, जो सच में तुम्हारे लिए बने हैं।
-
संबंधित विषय : आत्मविश्वास
आपको किसी के लिए विकल्प बनकर कभी नहीं रहना चाहिए।
तुम सबके लिए नहीं हो और सब तुम्हारे लिए नहीं हैं—यही बात असली लगाव को इतना दुर्लभ और क़ीमती बनाता है।
अगर कोई तुम्हें नज़रअंदाज़ करता है, अपमान करता है, या भूल जाता है—तो उनके लिए अपना समय और अपनी ऊर्जा ख़र्च करना बंद करो।
ज़रा से जीर्ण रूपों को, रोग से क्षीण शरीरों को और काल से ग्रस्त आयु को देखकर किसे अभिमान हो सकता है!