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भलाई पर उद्धरण

अहं का स्वभाव होता है अपनी ओर खींचना, और आत्मा का स्वभाव होता है बाहर की तरफ़ देना—इसलिए दोनों के जुड़ जाने से एक भयंकर जटिलता की सृष्टि हो जाती है।

रवींद्रनाथ टैगोर

सबकी भलाई में हमारी भलाई निहित है।

महात्मा गांधी

हम एक-दूसरे का भलाई में मुक़ाबला करें तो हम सब ऊँचे होकर काम कर सकते हैं।

महात्मा गांधी

संख्या-शक्ति, धन, पांडित्य, वाक्चातुर्य—कुछ भी नहीं, बल्कि पवित्रता, शुद्ध जीवन, एक शब्द में अनुभूति, आत्म-साक्षात्कार को विजय मिलेगी।

स्वामी विवेकानन्द

यह जीवन आता और जाता है—नाम, यश, भोग, यह सब थोड़े दिन के हैं। संसारी कीड़े की तरह मरने से अच्छा है, कहीं अधिक अच्छा है—कर्तव्य क्षेत्र में सत्य का उपदेश देते हुए मरना। आगे बढ़ो।

स्वामी विवेकानन्द

मनुष्य का सर्वोपरि उद्देश्य, सर्वश्रेष्ठ पराक्रम धर्म ही है और यह सब से आसान है।

स्वामी विवेकानन्द

स्वयं अच्छे बनो और जो कष्ट पा रहे हैं, उनके प्रति दया-संपन्न होओ। जोड़-गाँठ करने की चेष्टा मत करो, उससे भवरोग दूर नहीं होगा। वास्तव में हमें जगत् के अतीत जाना पड़ेगा।

स्वामी विवेकानन्द

हर एक मनुष्य को चाहिए कि वह दूसरे मनुष्य को इसी तरह, अर्थात् ईश्वर समझकर सोचे और उससे उसी तरह अर्थात् ईश्वर-दृष्टि से बर्ताव करे; उसे घृणा करे, उसे कलंकित करे और उसकी निंदा ही करे। किसी भी तरह से उसे हानि पहुँचाने की चेष्टा भी करे। यह केवल संन्यासी का ही नहीं, वरन् सभी नर-नारियों का कर्त्तव्य है।

स्वामी विवेकानन्द

योगी को चाहिए कि वे तन-मन-वचन से किसी के विरुद्ध हिंसाचरण करें। दया मनुष्य-जाति में ही आबद्ध रहे, वरन् उसके परे भी वह जाए और सारे संसार का आलिंगन कर ले।

स्वामी विवेकानन्द

ईश्वर मुझे काफ़ी सेहत और विवेक दे जिससे मैं मानव जाति की सेवा कर सकूँ।

महात्मा गांधी

यदि आपका दृष्टिकोण अच्छा है, तो प्रतिक्रिया भी अच्छी मिलेगी। अगर दृष्टिकोण ग़लत है, तो प्रतिक्रिया भी ग़लत ही मिलेगी।

जवाहरलाल नेहरू

जो मनुष्य बिना दिए खाता है और ऐसे खाने में सुख मानता है, वह पाप का भागी होता है।

स्वामी विवेकानन्द

यदि स्वभाव में समता भी हो, तो भी सबको समान सुविधा मिलनी चाहिए। फिर भी यदि किसी को अधिक तथा किसी को कम सुविधा देनी हो, तो बलवान की अपेक्षा दुर्बल को अधिक सुविधा प्रदान करनी आवश्यक है।

स्वामी विवेकानन्द

जो सुखकर हैं उन्हें प्रणाम करो और जो दु:खकर हैं उन्हें भी प्रणाम करो, ऐसा होने पर ही तुम स्वास्थ्य लाभ करोगे, शक्ति लाभ करोगे—जो शिव हैं, जो शिवकर हैं, उन्हें ही प्रणाम करना होगा।

रवींद्रनाथ टैगोर

अनंत धैर्य, अनंत पवित्रता तथा अनंत अध्यवसाय—सत्कार्य में सफलता के रहस्य हैं।

स्वामी विवेकानन्द

कबीर जिस लोकधर्म का विकास कर रहे थे, उसका मुख्य लक्ष्य है मानुष सत्य या मनुष्यत्व का विकास।

मैनेजर पांडेय

दुनिया के जितने धर्म हैं वे सब अच्छे हैं, क्योंकि वे भलाई सिखाते हैं। जो दुश्मनी सिखाते हैं, उनको मैं धर्म नहीं मानता।

महात्मा गांधी

टेढ़े रास्तें से सीधी बातको नहीं पहुँचा जा सकता।

महात्मा गांधी

यह जगत् सदा ही भले और बुरे का मिश्रण है। जहाँ भलाई देखो, समझ लो कि उसके पीछे बुराई भी छिपी है।

स्वामी विवेकानन्द

पक्षपात ही सब अनर्थों का मूल है, यह भूलना। अर्थात् यदि तुम किसी के प्रति अन्य की अपेक्षा अधिक प्रीति-प्रदर्शन करते हो, तो याद रखो—उसीसे भविष्य में कलह का बीजारोपण होगा।

स्वामी विवेकानन्द

मेरा मूलमंत्र है कि जहाँ जो कुछ अच्छा मिले, सीखना चाहिए।

स्वामी विवेकानन्द

जो भक्त होना चाहता है; वह दुष्ट प्रकृति के मनुष्यों के साथ भोजन करे, क्योंकि उनकी दुष्टता का भाव भोजन द्वारा फैलता है।

स्वामी विवेकानन्द

समग्र विश्व को प्रेम अपने घर जैसा बना लेता है।

स्वामी विवेकानन्द

संत और भक्त कवि, लोकमंगल की भावना से प्रेरित और लोकमंगल की साधना के कवि थे।

मैनेजर पांडेय

आप नकारात्मक चीज़ों पर ध्यान केंद्रित करके दुनिया की मदद नहीं कर सकते हैं। जब आप दुनिया में होने वाली नकारात्मक घटनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो आप सिर्फ़ उन्हें बढ़ाते हैं, बल्कि अपनी ज़िंदगी में आने वाली नकारात्मक चीज़ों को भी बढ़ा लेते हैं।

रॉन्डा बर्न

दुनिया का इतिहास इस बात का साक्षी है कि शुभ के समान अशुभ भी क्रमशः बढ़ ही रहा है।

स्वामी विवेकानन्द

रामकृष्ण परमहंस ने भिन्न-भिन्न धर्मों की साधना स्वयं करके, सब धर्मों की एकरूपता प्रत्यक्ष कर ली। तुकराम ने अपनी उपासना के सिवा दूसरे किसी की भी उपासना करते हुए भी, सारी उपासनाओं का सार जान लिया। जो स्वधर्म का निष्ठा से आचरण करेगा, उसे स्वभावतः ही दूसरे धर्मों के लिए आदर रहेगा।

महात्मा गांधी

यह धारणा कि शुभ और अशुभ ये दोनों पृथक् वस्तुएँ हैं और अनंत काल से चले रहे हैं—नितांत असंगत है।

स्वामी विवेकानन्द

क्या दुनिया पारस्परिकता पर चलती है? इसका मतलब है कि आप जो अच्छे कर्म करेंगे, वह आपके साथ होगा और जो बुरे कर्म करेंगे—वह भी आपके साथ होगा।

शम्स तबरेज़ी

आत्मीय बनें, दयालु बनें। प्रेम करें।

रूमी

अहिंसा को ठीक रूप में अपनाने में हमारी ही नहीं, संसार की भलाई है।

महात्मा गांधी

हमें अज्ञान और अशुभ का नाश करने का भरसक प्रयत्न करना चाहिए, केवल यह समझ लेना है कि शुभ की वृद्धि से ही अशुभ का नाश होता है।

स्वामी विवेकानन्द

दया अथवा क्रोध परमात्मा को ही शोभा देता है। मनुष्य की भलाई केवल धैर्य धारण करने और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकाश करने में ही है।

शम्स तबरेज़ी

जो लोग छोटे हैं उनकी दृष्टि केवल इसी बात पर पड़ती है कि कामना के आघात से मनुष्य बार-बार नीचे गिरता है। केवल महापुरुष ही यह बात देख सकते हैं कि सत्य के आकर्षण से मनुष्य पाशविकता से मनुष्यत्व की ओर अग्रसर हो रहा है। इसलिए वही मनुष्य को बार-बार निर्भयता से क्षमा कर सकते हैं, वही मनुष्य के लिए आशा कर सकते हैं, वही मनुष्य को सबसे बड़ा सत्य सुना सकते हैं, वही मनुष्य को बड़े-से-बड़ा अधिकार देने में नहीं हिचकते।

रवींद्रनाथ टैगोर

अच्छे काम के प्रति आदर और बुरे के प्रति तिरस्कार होना ही चाहिए। भले-बुरे काम करने वालों के प्रति सदा आदर अथवा दया रहनी चाहिए।

महात्मा गांधी

साहित्य अच्छे आदमी का निर्माण संभवतः इसी तरह करता है कि वह अपने से जुड़ने वाले को अन्यायी, अपराधी और निरर्थक ईर्ष्याओं का पात्र नहीं बनने देता।

लीलाधर जगूड़ी

कवि को दुश्चरित्रों, दुश्शीलों, पतितों, अटकों, भटकों और अपराधियों तक के प्रति, मानवीय ज़िम्मेदारी और करुणा से भरा हुआ होना चाहिए।

लीलाधर जगूड़ी

स्वदेशी व्रत केवल स्वदेशाभिमान के विचार में से नही उपजा है, बल्कि धर्म के विचार में से उपजा है।

महात्मा गांधी

राम और रावण के बीच की भारी लड़ाई में, राम भलाई की ताक़तों के प्रतीक थे और रावण बुराई की ताक़तों का। राम ने रावण पर विजय पाई, और इस विजय से हिंदुस्तान में रामराज्य क़ायम हुआ।

महात्मा गांधी

जब आप अपने समृद्ध जीवन की कल्पना करते हैं, तो आप आकर्षण के नियम द्वारा सशक्त और सचेतन रूप से अपने जीवन का निर्माण कर रहे हैं।

रॉन्डा बर्न

लोभ जिसमें है, फिर उसमें अन्य अवगुण क्या चाहिए? जो कुटिल है, उसे और पातक करने की क्या आवश्यकता है? सत्यवक्ता को तप का क्या प्रयोजन है? जिसका मन शुद्ध है, उसे तीर्थ करने से क्या अधिक फल होगा? जो सज्जन हैं, उन्हें मित्र और कुटुंब की क्या कमी है? यशस्वी पुरुषों के लिए यश से बढ़ कर क्या भूषण है।

भर्तृहरि

मैंने ध्यानपूर्वक प्रत्येक बात के तत्त्व को समझ लिया है—गाँठें सेवा करने की निशानी हैं।

शम्स तबरेज़ी

जब मैं अच्छा करता हूँ तो मुझे अच्छा महसूस होता है। जब ग़लत करता हूँ तो बुरा महसूस होता है—यही मेरा धर्म है।

अब्राहम लिंकन

अच्छा करने वाले के मन में स्वार्थ नहीं रहता। वह जल्दी नहीं करेगा। वह जानता है कि आदमी पर अच्छी बात का असर डालने में बहुत समय लगता है।

महात्मा गांधी

एक बड़ी भारी भूल जो हम लोग बहुधा करते हैं, वह यह कि शुभ को हम सदा बढ़ने वाली वस्तु समझते हैं और अशुभ को एक निश्चित राशि मानते हैं।

स्वामी विवेकानन्द

श्रेष्ठ महापुरुष वही होते हैं जो सारे धर्म, इतिहास और नीति से पृथ्वी के श्रेष्ठ दान को ग्रहण करते हैं।

रवींद्रनाथ टैगोर

योगी के लिए सब कुछ आनंदमय है, वह जिस भी मनुष्य का चेहरा देखता है, उससे उसे प्रसन्नता मिलती है। यही एक गुणी व्यक्ति की पहचान है।

स्वामी विवेकानन्द

जनसाधारण का मंगल बहुत-सी बातों के समन्वय से ही होता है।

रवींद्रनाथ टैगोर

आदमी दूसरों से बहुत कुछ सीख सकता है, लेकिन हर ज़रूरी बात उसे अपनी ही खोज और अपने ही अनुभव से प्राप्त करनी पड़ती है।

जवाहरलाल नेहरू

व्यापार तो ऐसा ही किया जाए जिसमें किसी के प्रति अपराध हो, जिसमें किसी की कौड़ी भी लेनी पड़े।

महात्मा गांधी