रुत्ख़ेर ब्रेख़्मान के उद्धरण
अगर हम अपने समय की सबसे बड़ी चुनौतियों—जलवायु के संकट से लेकर एक-दूसरे के प्रति हमारे उत्तरोत्तर बढ़ते जा रहे आविश्वास तक—से निपटना चाहते हैं, तो मुझे लगता है कि इसकी शुरुआत हमें मनुष्य के स्वभाव के बारे में, अपने दृष्टिकोण को बदलने के साथ करने की ज़रूरत है।
अनुवाद : मदन सोनी
जब संकट आता है, जब बम गिरते हैं या बाढ़ आती है—तभी हम मनुष्य अपने श्रेष्ठतम रूप में प्रकट होते हैं।
अनुवाद : मदन सोनी
मीडिया का आधुनिक उन्माद नीरसता पर भीषण हमला है, क्योंकि हमें ईमानदारी के साथ स्वीकार करना चाहिए कि ज़यादातार लोगों के जीवन ऐसे हैं, जिनका आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है।
अनुवाद : मदन सोनी
विनाश-लीलाएँ लोगों के श्रेष्ठतम पक्ष को सामने ले आती हैं।
मीडिया हमारे दिमाग़ में जो तस्वीर तैयार करता रहता है; वह निरंतर उन घटनाओं के विपरीत होती है, जो आपदा की घड़ियों में घटित होती है।
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बहुत ज़्यादा डर आपकी जान नहीं लेगा। बहुत कम डर निश्चय ही आपकी जान ले लेगा।
अनुवाद : मदन सोनी
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अगर आप किसी चीज़ में पर्याप्त यक़ीन करने लगते हैं, तो वह चीज़ वास्तविक हो सकती है।
अनुवाद : मदन सोनी
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हम वह हैं, जिस पर हम विश्वास करते हैं। हमें वही मिलता है, जिसकी हमें तलाश होती है और हम जो पूर्वानुमान करते हैं, वही होता है।
अनुवाद : मदन सोनी
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मानव-स्वभाव के प्रति आशावादी दृष्टिकोण, ताक़तवर लोगों के लिए पूरी तरह से डरावना होता है—विनाशकारी, बग़ावती।
अनुवाद : मदन सोनी
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ऐसे विचार बहुत कम है, जिनमें दुनिया को शक्ल देने की वैसी ताक़त है, जैसी दूसरे लोगों के बारे में हमारे दृष्टिकोण में होती है। क्योंकि अंततः आपको वही हासिल होता है, जिसे हासिल करने की आपने उम्मीद की होती है।
अनुवाद : मदन सोनी
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हम फ़रिश्ते नहीं है। हम जटिल या संशिलष्ट जीव हैं, जिनका एक पक्ष अच्छा भी है और एक पक्ष उतना अच्छा नहीं भी है।
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तानाशाह और आततायी, शासक और सेनापति, ये सब उन स्थितियों को रोकने के लिए—जिनका वजूद सिर्फ़ उन्हीं के दिमाग़ों में होता है—अक्सर क्रूर शक्त्तियों का इस्तेमाल करते हैं, यह मान कर कि औसत कमकाजी आदमी, उन्हीं की तरह अपने स्वार्थ से परिचालित होता है।
अनुवाद : मदन सोनी
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उम्मीद की वजह हमेशा तात्कालिक होती हैं।
अनुवाद : मदन सोनी
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ज़्यादातार पुस्तकें अपवादों के बारे में होती हैं।
अनुवाद : मदन सोनी
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