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अज्ञेय

1911 - 1987 | कुशीनगर, उत्तर प्रदेश

समादृत कवि-कथाकार-अनुवादक और संपादक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

समादृत कवि-कथाकार-अनुवादक और संपादक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

अज्ञेय के उद्धरण

अकेले बैठना, चुप बैठना—इस प्रश्न की चिंता से मुक्त होकर बैठना कि ‘क्या सोच रहे हो?’—यह भी एक सुख है।

एक निगाह से देखना कलाकार की निगाह से देखना नहीं है।

साहित्य तुम्हारी तुम्हीं से पहचान और गहरी करता है।

कपड़े पहनने ही के लिए नहीं हैं—उतार कर रखना भी होता है कि धुल सकें।

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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