गार्गी मिश्र के बेला
हिंदुस्तान आपको नींद की ज़रूरत है
मेरे प्यारे दोस्तो, हिंदुस्तान कभी सुबह जल्दी उठने वालों का देश हुआ करता था। यह हमारे डीएनए में था। सुबह उठकर आप बिना कि
गिफ़्टेड : एक जीनियस बच्ची के बचपन को बचाने की कहानी
अपनी माँ की भाषा में कहूँ तो गिफ़्टेड एक मामा और भांजी के एक आत्मीय रिश्ते पर आधारित एक फ़िल्म है। मामा यानी माँ का भाई,
CTRL : एक बेमेल दुनिया की सच्चाई, जहाँ से बचना लगभग असंभव है
कभी-कभी सोचती हूँ कि यह आभासी दुनिया भी कितनी उकताऊ हो चुकी है। कुछ भी आभासी देखने या सुनने का मन नहीं होता। जब मैंने ने
रामनगर की रामलीला
मुझे आज भी वह दिन याद है, जब मैंने पहली बार रामनगर, वाराणसी की रामलीला देखी थी। हम सब भाई-बहन ऑटो में बैठकर पापा के साथ
ईमानदार CA से मेल एस्कॉर्ट तक का सफ़र
संघर्ष, विद्रोह और समाजवाद की सिनेमाई यात्रा : नेटफ़्लिक्स सीरीज़ त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर आधुनिक भारतीय मनोरंजन की भ
एंग्री यंग मैन : सलीम-जावेद की ज़िंदगी के अनछुए अध्याय
नम्रता राव द्वारा निर्देशित अमेज़न प्राइम डाक्यूमेंट्री सीरीज़ ‘एंग्री यंग मैन’ मशहूर पटकथा लेखक जोड़ी—सलीम ख़ान और जावे
सेक्टर 36 : शहरों की नहीं दिखने वाली ख़ौफ़-भरी घटनाओं का रियलिस्टिक थ्रिलर
कभी-कभी सिनेमा देखने वालों को भी तलब होती है कि ऐसा कोई सिनेमा देखें जो उनके भीतर पनप रहे कोलाहल या एंग्जायटी को ऐसी ख़ुर
क़ुबूलनामा : एक एंबुलेंस ड्राइवर का
डिस्क्लेमर : क़ुबूलनामा शृंखला में प्रस्तुत लेखों में वर्णित सभी पात्र, कहानियाँ, घटनाएँ और स्थान काल्पनिक हैं; जो कि
सिद्धेश्वरी : मौन और ध्वनि की एक सिम्फ़नी
मणि कौल की फ़िल्म ‘सिद्धेश्वरी’ 1989 में बनी एक डॉक्यूमेंट्री है, जो प्रसिद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका सिद्धेश्वरी दे
क़ुबूलनामा : एक ड्रग पैडलर का
डिस्क्लेमर : यहाँ प्रस्तुत लेख में वर्णित सभी पात्र, कहानियाँ, घटनाएँ और स्थान काल्पनिक हैं; जो किसी भी व्यक्ति, समू
सत्यजीत रे और उनके स्वाद का संसार
सत्यजीत रे की सबसे उल्लेखनीय आदतों में से एक—भोजन की संस्कृति पर उनका विशेष ध्यान था। रे को भोजन, विशेष रूप से बंगाली व्
क्या विरासत में मिलती है लेखनी?
ज़्यादा न लिखो। अपने पात्रों को अपनी कहानी बताने दो और इस पूरे काम में दख़ल मत दो। अपने पाठक को पहले ही पृष्ठ से यूँ बाँध
ख़ुशियों का एरोडायनामिक्स : काग़ज़ के हवाई जहाज़
हर साल 26 मई को पार्कों, खेत-खलिहानों और कक्षाओं में एक अजीब-ओ-ग़रीब लेकिन बेहद रोमांचक दृश्य देखने को मिलता है : आसमान र
नाऊन चाची जो ग़ायब हो गईं
वह सावन की कोई दुपहरी थी। मैं अपने पैतृक आवास की छत पर चाय का प्याला थामे सड़क पर आते-जाते लोगों और गाड़ियों के कोलाहल को