Font by Mehr Nastaliq Web

सच पर ग़ज़लें

बात होता कि सरग

अशोक द्विवेदी

झलकेले खुशी बीच

अशोक द्विवेदी

लाज नाहीं शरम

कृष्णानन्द कृष्ण

दरद जिन्दगी के सजा

जौहर शफियाबादी

इंसान सुधरि जाय

अशोक अज्ञानी

नेह घर से

जौहर शफियाबादी

बात कुछ बनत

कृष्णानन्द कृष्ण

छुट्टा हरहा खेतु

अशोक अज्ञानी

मीत, जब मीत

मिथिलेश ‘गहमरी’

का रखल बा अब

कृष्णानन्द कृष्ण

गीली केहिकै कोर

अशोक अज्ञानी

देखलीं, कि बात

मिथिलेश ‘गहमरी’

आग रहे हवा

मिथिलेश ‘गहमरी’

सच कहना

डी. एम. मिश्र

ग़मज़दा

डी. एम. मिश्र

क्या हैं हम

नवल बिश्नोई

मुकरियाँ

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

दर्द

नवल बिश्नोई

बातें जो हर क्षण

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

फ़रियाद

डी. एम. मिश्र

सच एकदम

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

बुझे न प्यास

डी. एम. मिश्र

बोझ धान का लेकर

डी. एम. मिश्र

टूटे सच का गुमान

आनंद बहादुर

लोगों के

नवल बिश्नोई