पाखंड पर कविताएँ

इस चयन में प्रस्तुत

कविताओं का ज़ोर पाखंडों के पर्दाफ़ाश पर है। ये कविताएँ पाखंड को खंड-खंड करने का ज़रूरी उत्तरदायित्व वहन कर रही हैं।

शीर्षकहीन

जितेंद्र कुमार

फ़क़ीर

अजेय

समझदारों का गीत

गोरख पांडेय

दीदी

प्रमोद कुमार तिवारी

दाढ़ी में आग

रेखा चमोली

किधर से चढ़ेंगे आप?

राजकमल चौधरी

सत्य-असत्य

वाज़दा ख़ान

कुछ लोग

नरेश सक्सेना

मूर्खता

विनय विश्वास

समुद्र-मंथन

शरद बिलाैरे

ओझौती जारी है

विहाग वैभव

जश्न-ए-रेख़्ता (2022) उर्दू भाषा का सबसे बड़ा उत्सव।

फ़्री पास यहाँ से प्राप्त कीजिए