Font by Mehr Nastaliq Web

शनिवारेर चिट्ठी पर बेला

29 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : हिन्दवी उत्सव : मेरी दुनिया कविता की दुनिया है

शनिवारेर चिट्ठी : हिन्दवी उत्सव : मेरी दुनिया कविता की दुनिया है

आगमन 15:17 : तुम सरस जानती हो, मुझे ख़ास संधी पर नए कपड़े पहनना अच्छा लगता है। कारणमूल यही कि मॉल जा पहुँचा। नज़रें उड़ाने भर से ही उभर कर आया दरिद्राभास… सोचने लग पड़ा कि भारतीय मिडिल क्लास में दर्ज

22 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : इलाहाबाद मेरा दिल तोड़ देगा

शनिवारेर चिट्ठी : इलाहाबाद मेरा दिल तोड़ देगा

दर्शन क्या हम किसी ऐसे शहर के प्रेम में हो सकते हैं जहाँ कभी गए नहीं?  शहर—जिसे देखा नहीं। जिसकी गलियों को तैरकर पार न हुए। धूल जूतों पर चढ़ी नहीं। जिसकी किसी दीवार से पीठ टिकाकर चुप बैठे नहीं य

15 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : ये जो देस है तेरा

शनिवारेर चिट्ठी : ये जो देस है तेरा

जन  क्या तुम विस्मय करोगी अगर कहूँ कि 15 अगस्त के दिन-विशेष के बारे में सोचूँ तो उल्लास से मेरे लौटने की अकेली मुकम्मल जगह मेरे बचपन में मिलती है! माँ सामने आती हैं। उन्होंने सुफ़ेद-सी सूती साड़ी पह

08 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : इस बार सावन दहका हुआ है

शनिवारेर चिट्ठी : इस बार सावन दहका हुआ है

20:32—बुधवार बे-तरतीब बारिश हो रही है। मतलब मैं कुछ बे-तरतीब वाक्य संभव करना चाहता हूँ। मसलन बारिश हो रही है। मतलब तुम्हारी याद आ रही है। मतलब बादल अपनी काली देह में बंद समुद्रों की अधूरी स्मृतिया

01 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : गाली बयान नहीं चीख़ है

शनिवारेर चिट्ठी : गाली बयान नहीं चीख़ है

सिनेमा  शासकों को यह भ्रम प्रिय होता है कि वे इतिहास लिखते हैं। वे यह नहीं समझते कि एक पोस्टर, एक भंगिमा, एक नारे, एक मीम से उनके इस कथित इतिहास को चुनौती दी जा सकती है। इन दिनों मुझे एक फ़िल्म याद

25 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : मुझे मुआफ़ करना प्रिय!

शनिवारेर चिट्ठी : मुझे मुआफ़ करना प्रिय!

मुझे मुआफ़ करना प्रिय! इतना भर कह देने से क्या होता है कि मन इस पूरे हफ़्ते खिन्न रहा। यह कहने से कि चीज़ें देखता-सुनता रहा और आँखें भीगती रहीं। कभी निराशा से तो कभी बिजली की तरह कौंध आती आशा से। यह

18 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : झरना बड़ी हँसमुख लड़की है...

शनिवारेर चिट्ठी : झरना बड़ी हँसमुख लड़की है...

दीपालिका क्या कहोगी जो कहूँ कि मुझे असुंदरता कुछ असहज करती है। यह राय मैंने किसी एक अनुभव के बिना पर तय की। मैंने उन्हें सुंदर स्त्रियाँ और कुछ कम सुंदर स्त्रियाँ कह साहचर्य निभाया। वह एक भली स्त्

11 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी  : एक दुनिया, दूसरी दुनिया

शनिवारेर चिट्ठी : एक दुनिया, दूसरी दुनिया

हेडर इतिहास यह आदत रखता है कि वह अपने आरंभों को पीछे मुड़कर पहचानता है। जब कोई युग वास्तव में जन्म ले रहा होता है, तब वह किसी उद्घोषणा के साथ नहीं आता। वह एक साधारण दिन की तरह आता है, इतना साधारण

04 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : डेंटिस्ट का पति और अन्य प्रकरण

शनिवारेर चिट्ठी : डेंटिस्ट का पति और अन्य प्रकरण

पहली सीटिंग अह, यह कैसी आपद-कथा रही! वहाँ जाना आसान था तो मैं गया। पड़ोस में ज़रूरी चीज़ों की उपस्थिति को हम एक क़िस्म का सामाजिक सौभाग्य ही कहें। पड़ोस था मन में तो मिलते ही उससे कह भी दिया, “पड़ोसी ह

27 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : पुलिसवाली है या लेस्बियन, उधर जो औरत है? कहाँ?

शनिवारेर चिट्ठी : पुलिसवाली है या लेस्बियन, उधर जो औरत है? कहाँ?

पूर्वग्रह मुहल्ले में ‘मौग’ होना उपहास की बात थी। बसों-ट्रामों में हाथ बजाकर अपनी पहचान जताना किसी हीनता की निशानी। और मैदान के अँधेरे कोनों में खींच लिया जाता अथवा स्वेच्छा से ‘व्यभिचार’ में

20 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : मैं आशाओं से नहीं, पुनरावृत्तियों से बना मनुष्य हूँ

शनिवारेर चिट्ठी : मैं आशाओं से नहीं, पुनरावृत्तियों से बना मनुष्य हूँ

ये  यह छत की ओर खुलती खिड़की से तेज़ हवा के आने और रसोई की खिड़की से तेज़ क़दम बाहर निकल जाने की आज की बेला है। बाहर अँधेरा है तो यह रात है। लिखने की इच्छा और लिखने से बचने की इच्छा मेरे भीतर हमेशा एक

13 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

सबसे पहले तुम, शशि! इसलिए नहीं कि तुम जीवन में सबसे पहले आईं या कि तुम सबसे ताज़ा स्मृति हो। इसलिए कि मेरा होना अनिवार्य रूप से तुम्हारे होने को लेकर है... [शेखर : एक जीवनी, शेखर : उत्थान—प्रवेश

06 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : अनुवाद का सप्ताह

शनिवारेर चिट्ठी : अनुवाद का सप्ताह

मं., यह सप्ताह अनुवाद का सप्ताह था। अभी यह बात जब तुम्हें लिख रहा हूँ तो लगता है कि मैंने इस सप्ताह के बारे में सबसे कम महत्त्वपूर्ण बात पहले ही वाक्य में कह दी है। यह श्लील नहीं है। यह ग्लानि, बे

30 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : अजाने देशों में

शनिवारेर चिट्ठी : अजाने देशों में

यात्रा-कल्पना-स्मृति तीन घंटे की एक बस-यात्रा किसी मनुष्य को क्या दे सकती है? वह कवि है तो अधैर्य। वह प्रेम में है तो प्रत्याशा। वह पुरानी होती स्त्री है तो पीठ की पीड़ा और वह ऊब रहा आदमी है तो...

23 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : घर की जगह

शनिवारेर चिट्ठी : घर की जगह

डेरा मनुष्य अपने घर के बारे में सबसे कम तब सोचता है, जब वह अपने घर का निवासी होता है। तब घर की उपस्थिति इतनी स्वाभाविक होती है कि वह लगभग अदृश्य हो जाता है। बचपन में “हमारा अपना दो-मंज़िला घर है”

16 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : क्रिस्टोफ़र नोलन, अमृता शेर-गिल, मंगलेश डबराल और अन्य मुलाक़ातें

शनिवारेर चिट्ठी : क्रिस्टोफ़र नोलन, अमृता शेर-गिल, मंगलेश डबराल और अन्य मुलाक़ातें

समय वह किसी सीधी बहती हुई नदी की तरह नहीं। वह लौटता हुआ और मुड़ता हुआ। समय अपनी ही दिशा पर संदेह करता हुआ। समय बंद वृत्त है और ‘इन्वर्ज़न’ समय की स्मृति के विखंडन के रूप में। भविष्य और अतीत एक-दूसर

09 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : वहाँ नहीं है अब कोई घर सुफ़ेद

शनिवारेर चिट्ठी : वहाँ नहीं है अब कोई घर सुफ़ेद

स्मृति के घर अँधेरा स्मृति के घर अँधेरा बहुत है। सिर्फ़ आँखें काम नहीं करतीं। नाक भी लगता है काज पर। शून्य को सुनना पड़ता है कानों को। हाथों को हवा को टटोलना पड़ता है। विस्मृति ने कोई शोर भी तो नहीं

02 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : छाया और छायेच्छाएँ

शनिवारेर चिट्ठी : छाया और छायेच्छाएँ

छायालीन यह दृश्य है या एक ठहरा हुआ उच्चारण! जैसे समय ने अपनी जीभ बाहर निकाल शब्द को अधूरा छोड़ दिया हो। क्षितिज पर शहर कोई ठोस आकृति नहीं, धुंध का अभ्यास है। वह अपने होने को सिद्ध नहीं करता, संकेत

25 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

स्फुलिंग कमरा-तर, कमरा-कम या अ-कमरा जैसे शब्द भी कहीं होते हैं, कहो तो! तो फिर बहुत से कमरों के बारे में अंतर की कुछ-कुछ बातें कहने के लिए यो-वो शब्द न हो तो किस कार्य में लगेगा वह कवि के? अंतर की

18 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : दिनानुदिन की चूलें बिठाते हुए

शनिवारेर चिट्ठी : दिनानुदिन की चूलें बिठाते हुए

सोमवार मैं लौटने की आख़री सड़क पर हूँ। यह सोमवार की तेज़ भागती सड़क है। इसकी रफ़्तार को दो दिनों के घर-आराम के बाद ‘काम पर लौटने’ के पंख लगे हैं। घर से पश्चिम की ओर निकलती है पहली सड़क। वह रास्ता बदलती

11 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : कल से रवैया फ़र्क़ होगा

शनिवारेर चिट्ठी : कल से रवैया फ़र्क़ होगा

अथ कोई अलसकथा नहीं! रविवार के उस दुपहर-उष्ण में ऊँघने के स्वाँग में तुम्हारी पीठ पर श्वासों की सुदीर्घ कविताओं का पाठ नहीं कर सका, खमा करो। मुझे एक नए आरंभ की पहली सीढ़ी पर पाँव धरने थे। अभी कितना