Font by Mehr Nastaliq Web

ऋतु पर बेला

06 सितम्बर 2026

बिंदुघाटी 2.0 : मेहनत बहुत करनी है

बिंदुघाटी 2.0 : मेहनत बहुत करनी है

• भादों-विहार  भादों दूभर महीना माना गया है। सावन की झँकोर जवानी उसमें नहीं होती। भादों की बरखा से धरती के कोश भर जाते हैं।  सावन में धरती गल जाती है; ताल भरने लगते हैं, धान जड़ पकड़ लेते हैं, उन

28 अगस्त 2026

सावन-गात खँची कजरी की अल्पना

सावन-गात खँची कजरी की अल्पना

आषाढ़ की साँझें हमेशा किसी के लौटने की आहट लेकर आती हैं। दिन भर की धूप से तपे हुए आकाश के किसी कोने में जब पहली कारी रेखा दिखाई देती है, तो लगता है जैसे बहुत दूर गया हुआ कोई अपना, स्मृति की देहरी पर

09 अगस्त 2026

बिंदुघाटी 2.0 : जीटी रोड पर सावन आ गया है

बिंदुघाटी 2.0 : जीटी रोड पर सावन आ गया है

• ‘बिंदुघाटी’ के पिछले अंकों में भारत की राजनीति के संदर्भ में अगले कुछ वर्षों के लिए दबाव-समूह की महत्ता को रेखांकित किया गया था और इसमें कॉकरोच जनता पार्टी [सीजेपी] की महती भूमिका की अपेक्षा भी की

08 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : इस बार सावन दहका हुआ है

शनिवारेर चिट्ठी : इस बार सावन दहका हुआ है

20:32—बुधवार बे-तरतीब बारिश हो रही है। मतलब मैं कुछ बे-तरतीब वाक्य संभव करना चाहता हूँ। मसलन बारिश हो रही है। मतलब तुम्हारी याद आ रही है। मतलब बादल अपनी काली देह में बंद समुद्रों की अधूरी स्मृतिया

13 जुलाई 2026

‘धूप कोठरी के आइने में खड़ी’ : शमशेर की कविता पढ़ते हुए एक स्मृति-चित्र

‘धूप कोठरी के आइने में खड़ी’ : शमशेर की कविता पढ़ते हुए एक स्मृति-चित्र

बचपन से बड़े होने के स्कूली क्रम में कुछ नौ-दस साल की उम्र में बाजी (दादी) के घर में ऐसे अनुभवों से भरी गर्मियों की न जाने कितनी दुपहरें आती थीं। पुराना घर था। आगे के हिस्से में चार कमरे और एक बरामदे

10 अप्रैल 2026

वसंत का प्रताप

वसंत का प्रताप

वसंत। अहा! शब्द कान के पर्दों पर पड़ते ही हृदय को आह्लादित कर देता है। शरद की तीक्ष्ण शीतलहर प्रस्थान कर चुकी है। ग्रीष्म के आगमन की आहट भी अभी निकट नहीं है। न ठिठुरन है, न पसीने से भीगता बदन ही। अलाव

07 जुलाई 2025

हथेलियों में बारिश भरती माँ

हथेलियों में बारिश भरती माँ

इलाहाबाद उस दिन मेघों से आच्छादित रहा। कुछ देर तक मूसलाधार फिर रुक-रुक कर बारिश होती रही। मैं अपने कमरे में बैठा अमरूद के पेड़ पर गिर रही बूँदों को देख रहा था। देखते हुए स्मृतियों की बूँदें मेरे मन प

26 जनवरी 2025

रविवासरीय : 3.0 : वसंत उर्फ़ दाँत की दवा कान में डाली जाती है

रविवासरीय : 3.0 : वसंत उर्फ़ दाँत की दवा कान में डाली जाती है

• आगामी रविवार को वसंत पंचमी है। हिंदी में तीस-पैंतीस वर्ष की आयु के बीच जी रहे लेखकों के लिए एक विशेष दिन है। वे इस बार न चूकें। ऐसा मुझे स्वयं वसंत ने बताया है।  • गए रविवार से लेकर इस रविवार के

06 दिसम्बर 2024

शरद ऋतु में, शरद ऋतु में, शरद ऋतु में ही

शरद ऋतु में, शरद ऋतु में, शरद ऋतु में ही

मैं पानी पी रही हूँ और तभी जब पानी मेरे गले से होता हुआ भीतर जाता महसूस हो रहा है, उसी पल कोयल की आवाज़ आने लगी। उस क्षण मुझे लगा मेरे कंठ से आवाज़ आएगी और कोयल कंठ के साथ गाती रहेगी। चार क़दम चलक