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पानी पर बेला

पानी या जल जीवन के अस्तित्व

से जुड़ा द्रव है। यह पाँच मूल तत्त्वों में से एक है। प्रस्तुत चयन में संकलित कविताओं में जल के विभिन्न भावों की प्रमुखता से अभिव्यक्ति हुई है।

08 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : इस बार सावन दहका हुआ है

शनिवारेर चिट्ठी : इस बार सावन दहका हुआ है

20:32—बुधवार बे-तरतीब बारिश हो रही है। मतलब मैं कुछ बे-तरतीब वाक्य संभव करना चाहता हूँ। मसलन बारिश हो रही है। मतलब तु

16 फरवरी 2026

छोटी नदियों का बड़ा शोक

छोटी नदियों का बड़ा शोक

यदि कविता, साहित्य की प्राचीनतम विधा है तो यह भी सही है कि शायद ही ऐसा कोई कवि होगा जो अपने साहित्यिक जीवन में नदी पर कव

30 जनवरी 2026

जगह-जगह 2.0 : मोबी-डिक : सनक, साहस और समुद्र की कथा

जगह-जगह 2.0 : मोबी-डिक : सनक, साहस और समुद्र की कथा

पानी ये पानी ख़ामुशी से बह रहा है इसे देखें कि इसमें डूब जाएँ —अहमद मुश्ताक़ समुद्र-साहित्य केवल साहसिक कथाओं स

07 जुलाई 2025

हथेलियों में बारिश भरती माँ

हथेलियों में बारिश भरती माँ

इलाहाबाद उस दिन मेघों से आच्छादित रहा। कुछ देर तक मूसलाधार फिर रुक-रुक कर बारिश होती रही। मैं अपने कमरे में बैठा अमरूद क