Font by Mehr Nastaliq Web

वियोग पर गीत

वियोग संयोग के अभाव

या मिलाप न होने की स्थिति और भाव है। शृंगार में यह एक रस की निष्पत्ति का पर्याय है। माना जाता है कि वियोग की दशा तीन प्रकार की होती है—पूर्वराग, मान और प्रवास। प्रस्तुत चयन में वियोग के भाव दर्शाती कविताओं का संकलन किया गया है।

द्वितीया

अज्ञेय

शलभ मैं शापमय वर हूँ

महादेवी वर्मा

काहे जननी क सनेहिया परइला तोड़ के

रामजियावान दास ‘बावला’

कौशल्या राम से

रामजियावान दास ‘बावला’

ना अइलऽ बरिसात में

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

कानि रहल-ए कंगना

राम चैतन्य धीरज

सुविधा लेलक समाधि

मार्कण्डेय प्रवासी

नैना झरे हरसिंगार

भोलानाथ गहमरी

कलकतवा से मोर पिया

महेन्द्र मिसिर

अँगनामे

राम चैतन्य धीरज

कवन बन गइलैं ललना हमार हो

रामजियावान दास ‘बावला’

सिया जी के अँसुवा में जिनिगी नहाय

रामजियावान दास ‘बावला’

लाली-लाली डोलिया

भोलानाथ गहमरी

बदरा ले जा सनेस

भोलानाथ गहमरी

विरह का जलजात

महादेवी वर्मा

महुआ के फूल झरे

भोलानाथ गहमरी

बोलि उठे कोइलरिया

भोलानाथ गहमरी

तोरे बीनु लागे न जीया

भोलानाथ गहमरी

कहीं भींजे न कजरा

भोलानाथ गहमरी

अगिन धधकावे

भोलानाथ गहमरी

जनि जा बिदेस

भोलानाथ गहमरी

सखि फागुन आइल

रामजियावान दास ‘बावला’

असों के फगुनवाँ

भोलानाथ गहमरी

चिरइया बसेर रे

भोलानाथ गहमरी

इयाद उनकर सगर रात आवत रहल

तैयब हुसैन पीड़ित

नागिन गय, नाँच!

मार्कण्डेय प्रवासी

मारैला सवनवाँ कटार हो

रामजियावान दास ‘बावला’

ना जाने कजरा के मोल

भोलानाथ गहमरी

पुरवइया धीरे बहऽ

तैयब हुसैन पीड़ित

सारी-सारी रतिया

भोलानाथ गहमरी

अँगनवा अन्हारे रहल

तैयब हुसैन पीड़ित

मारे अगिनियाँ के बान

भोलानाथ गहमरी