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वियोग पर कविताएँ

वियोग संयोग के अभाव

या मिलाप न होने की स्थिति और भाव है। शृंगार में यह एक रस की निष्पत्ति का पर्याय है। माना जाता है कि वियोग की दशा तीन प्रकार की होती है—पूर्वराग, मान और प्रवास। प्रस्तुत चयन में वियोग के भाव दर्शाती कविताओं का संकलन किया गया है।

इच्छा

सौरभ अनंत

मेरा साथ न छोड़ना

गैब्रिएला मिस्ट्राल

यह कहकर

विनोद कुमार शुक्ल

एक और ढंग

श्रीकांत वर्मा

पार करना

प्रदीप सैनी

सब कुछ वापस लौट आता है

निकोला माज़ीरोव

इच्छा का पेड़

प्रतीक ओझा

उसने उससे कहा

महमूद दरवेश

जाते हुए थोड़ा-सा जाना

विनोद कुमार शुक्ल

प्यार हमारे बीच उगा

मिगुएल हर्नांदेज़

रेलपथ

बेबी शॉ

मन में क्षीण होती है याद

अन्ना अख्मातोवा

पलाश

मनोज कुमार पांडेय

दुपहर का सूरज

सी. पी. कवाफ़ी

तुम जानती हो

यूजीनियों मोंताले

तुम्हें मेरी याद

सोतिरिस स्किपिस

स्पर्श

मदन कश्यप

कोई तो

रचित

पुल

वोत्येज्स्लव नेज्वल

आया नहीं आज कोई पत्र

अन्ना अख्मातोवा

अक्टूबर

रवि यादव

एक गिटार-गीत

लियोपोल्ड सेडार सेंगोर

पति-पत्नी

निखिल आनंद गिरि

तुम अगर सिर्फ़

सारुल बागला

रहमान, सलमा और मैं

दिलीप पुरुषोत्तम चित्रे

मौलसिरी

सुतिंदर सिंह नूर

वैंटाब्लैक

राकेश कुमार मिश्र

बँटवारा

यी संग ह्वा

प्रेम में

सुधांशु फ़िरदौस

बाहर बारिश

अविनाश मिश्र

नमक पर यक़ीन ठीक नहीं

नवीन रांगियाल

चार पंक्तियाँ

यानोश पिलिंस्की

बेटी का स्कूल

निखिल आनंद गिरि

तुम केवल मिला ही करो

सुतिंदर सिंह नूर

बिछड़ना

विजय राही

बिछुड़न की रात का काजल

वीरेंद्र कुमार जैन