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ख़तरा पर उद्धरण

वे जो स्वयं को भद्र, सम्मानित और सुसंस्कृत मानने और मनवाने का पाखंड करते हैं, उनके व्यवहारों में छिपी या कभी-कभी कतई प्रकट हिंसा—संभवतः सबसे भयावह और सूक्ष्म हिंसा है।

ललित कार्तिकेय

यह बिलकुल आसान नहीं है कि ख़तरा किस ढंग से ख़तरनाक है, यह देखा जा सके।

एरिक हॉब्सबॉम

शब्द—विचार का भोजन, शरीर, दर्पण और ध्वनि हैं। क्या अब आप उन शब्दों के ख़तरे को देखते हैं जो बाहर आना चाहते हैं, लेकिन ऐसा करने में असमर्थ हैं?

न्गुगी वा थ्योंगो

आत्यन्तिकता और अराजकता, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और सामान्य मनुष्य के लिए सबसे बड़ा ख़तरा इन्हीं से है।

केदारनाथ सिंह

ख़तरों से घृणा की जाए तो वे और बड़े हो जाते हैं।

एडमंड बर्क

भगवान और डॉक्टर की हम समान आराधना करते हैं, परंतु करते तभी हैं जब हम संकट में होते हैं, पहले नहीं। संकट समाप्त होने पर दोनों की समान उपेक्षा की जाती हैं—ईश्वर को भुला दिया जाता है, और डॉक्टर को तुच्छ मान लिया जाता है।

जॉन ओवेन

ख़तरा टलते ही ईश्वर का विस्मरण हो जाता है।

थॉमस फ़ुलर

ख़तरा हमारी छिपी हुई हिम्मतों की कुंजी है।

प्रेमचंद