पण्डितराज जगन्नाथ के उद्धरण
जो व्यक्ति दुष्टों में साधुता लाने का कार्य करता है, वह मानो आकाश में घर बनाता है, जल में सुंदर चित्र बनाता है और वायु को जल से नहलाता है।
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बंदर किसी मूर्ख द्वारा गले में पहनाए गए हार को पहले चखता है, फिर सूँघता है और अंत में उसे बटोरकर, नीचे रखकर उसे अपना आसन बना लेता है।
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संबंधित विषय : मूर्ख
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