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प्रतिबद्धता पर उद्धरण

विद्वानों के मुख से वचन एकाएक नहीं निकलते हैं, यदि निकल गए तो वे इस तरह पीछे नहीं हटते, जैसे हाथियों के दाँत।

पण्डितराज जगन्नाथ