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जॉन ग्रे

1948 | ह्यूस्टन, टेक्सास

लोकप्रिय लेखक और स्त्री-पुरुष संबंध परामर्शदाता।

लोकप्रिय लेखक और स्त्री-पुरुष संबंध परामर्शदाता।

जॉन ग्रे के उद्धरण

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हमारे बच्चे बेहतर संसार के हक़दार हैं।

लक्ष्य-केंद्रित होने के बजाए महिलाएँ संबंध-केंद्रित होती हैं। वे अपनी अच्छाई, प्रेम और परवाह व्यक्त करने से ज़्यादा सरोकार रखती हैं।

जब पुरुष और महिलाएँ अपनी भिन्नताओं को समझ लेते हैं; उनका सम्मान करते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तो प्रेम को पल्लवित और विकसित होने का मौक़ा मिल जाता है।

महिलाएँ और पुरुष जीवन के सभी क्षेत्रों में एक-दूसरे से अलग होते हैं। पुरुष और महिलाएँ सिर्फ़ अलग तरह से बोलते हैं, बल्कि वे अलग तरीक़े से सोचते हैं, महसूस करते हैं, अनुभूति करते हैं, प्रतिक्रिया करते हैं, प्रेम करते हैं और प्रशंसा करते हैं। उनकी आवश्यकताएँ एक-दूसरे से बहुत अलग होती हैं। ऐसा लगता है, जैसे वे अलग-अलग ग्रहों से आए हैं, अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं और उन्हें अलग-अलग पोषण की ज़रूरत होती है।

अगर आप महिला हैं, तो मेरा सुझाव है कि आप अगले सप्ताह किसी पुरुष को किसी तरह की बिन माँगी सलाह दें या किसी तरह से आलोचना करें। आपके जीवन के पुरुष सिर्फ़ इसकी क़द्र करेंगे, बल्कि वे आप पर ज़्यादा ध्यान भी देंगे प्रतिक्रियाशील होंगे।

जब कोई महिला तनाव में होती है; तो वह तुरंत अपनी समस्याओं का समाधान नहीं चाहती, बल्कि वह तो अपनी भावनाएँ व्यक्त करके और सामने वाले की समझ भरी प्रतिक्रिया से राहत पाना चाहती है।

पुरुष महिला के प्रतिरोध को ज़्यादा अच्छी तरह सँभाल सकता है, अगर वह यह समझ ले कि उसके समाधानों को अस्वीकार नहीं किया जा रहा है, बल्कि उसकी टाइमिंग और संवाद शैली को अस्वीकार किया जा रहा है।

महिलाओं के 'स्व' का अहसास, उनकी भावनाओं और उनके संबंधों की गुणवत्ता से परिभाषित होता है।

अगर आप पुरुष हैं, तो मेरा सुझाव है कि अगले सप्ताह जब भी कोई महिला बोले, तो आप सुनने का अभ्यास करें। वह किस स्थिति से गुज़र रही है, उसे सम्मानपूर्वक समझने के एकमात्र इरादे के साथ सुनें। जब भी आपके मन में समाधान सुझाने या उसके अहसास को बदलने की इच्छा जाग्रत हो, तो दाँतों तले जीभ दबा लें। ऐसा करने पर वह आपकी इतनी क़द्र करेगी कि आप हैरान रह जाएँगे।

हम ग़लती से यह मान लेते हैं कि अगर हमारा जीवनसाथी हमसे प्रेम करता है, तो वह निश्चित तरीक़े से प्रतिक्रिया और व्यवहार करेगा। उसी तरीक़े से, जिस तरह हम किसी से प्यार करने पर करते हैं।

पुरुषों के स्व का अहसास, उनकी परिणाम हासिल करने की योग्यता से परिभाषित होता है।

पुरुष महिलाओं की बात सुनने से बचते हैं, इसका एक कारण यह भी है कि पुरुष परिणाम की तलाश करता है। जब तक कि उसे परिणाम पता हो, तब तक वह अपना समाधान नहीं बता सकता।

जब हमारे साथी हमारा प्रतिरोध करते हैं; तो ऐसा शायद इसलिए है, क्योंकि हमारी टाइमिंग या नीति ग़लत थी।

संबंध बनाने और संवाद करने के नए स्वस्थ तरीक़े सीखना अनिवार्य है।

हम में भिन्नताएँ स्वाभाविक हैं—इस ज्ञान के बिना पुरुष और महिलाएँ हमेशा एक-दूसरे के विरोध में रहेंगे।

हर दिन करोड़ों लोग प्रेम की इस ख़ास भावना को महसूस करने के लिए साथी की तलाश कर रहे हैं। हर साल करोड़ों लोग नए प्रेम प्रसंग स्थापित करते हैं और फिर उनका दु:खद विच्छेद हो जाता है, क्योंकि उनके रिश्ते में प्रेम की वह भावना नहीं बची है।

प्रेम में पड़ना जादुई अनुभव है। शुरुआत में हमें लगता है कि हमारा प्रेम अजर-अमर है। हम नादानी में यह विश्वास कर लेते हैं कि हमारे जीवन में वे समस्याएँ नहीं आएँगी, जो हमारे माता-पिता के वैवाहिक जीवन में आई थीं।

आम तौर पर जब कोई महिला बिना माँगे सलाह देती है या किसी पुरुष की 'मदद' करने की कोशिश करती है, तो उसे इस बात का अहसास ही नहीं होता कि उसकी बात पुरुष को कितनी आलोचनात्मक या प्रेमहीन लग सकती है।

प्रेम जादुई होता है और यह क़ायम रह सकता है, बशर्ते हम अपनी भिन्नताओं को याद रखें।

पुरुष तब सुधार करने के लिए तैयार होता है, जब उसे महसूस होता है कि उसे समस्या नहीं, बल्कि समस्या का समाधान माना जा रहा है।

किसी पुरुष को बिन माँगी सलाह देने का मतलब यह मानना है कि उसे काम करना नहीं आता, या वह उस काम को अपने दम पर अकेला नहीं कर सकता।

महिला का दुखड़ा सुनना, पुरुष के लिए कई बार इतना ज़्यादा मुश्किल या दूभर होता है। जब वह किसी चीज़ पर निराश या दु:खी होती है; तो पुरुष को ऐसा महसूस होता है, जैसे वह असफल हो गया हो।

जब कोई पुरुष महिला की आवश्यकताओं को नज़रअंदाज़ करता रहता है, तो ऐसा लगता है जैसे दोनों सोए हुए हैं। जब वह जागती है और उसे अपनी ज़रूरतें याद आती हैं, तो वह भी जागता है और महिला को ज़्यादा देना चाहता है।

अगर पुरुष को यह यह लगने लगे कि किसी को उसकी ज़रूरत नहीं है, तो यह अहसास उसके लिए धीमी मृत्यु के समान होता है।

महिला की बात सुनना किसी पुरुष के लिए मुश्किल होता है; क्योंकि वह ग़लती से तार्किक क्रम की उम्मीद करता है, जबकि महिला एक समस्या से दूसरी समस्या पर बिना किसी क्रम के कूदती रहती है।

जब कोई महिला सीमाएँ तय करती है, तो वह धीरे-धीरे तनावरहित होना और ज़्यादा लेना सीख जाती है।

महिलाओं के लिए सिर्फ़ दूसरों की आवश्यकता दुविधाजनक होती है, बल्कि निराश होना या परित्याग होना खास तौर पर दर्द भरा होता है—सबसे छोटे तरीक़ों से भी। दूसरों पर निर्भर होना और फिर नज़रअंदाज़ किया जाना, भुला दिया जाना या ख़ारिज किया जाना, किसी महिला के लिए आसान नहीं होता। दूसरों की ज़रूरत महिला को संवेदनशील और असुरक्षित स्थिति में रख देती है। नज़रअंदाज़ किए जाने या निराश किए जाने से उसे ज़्यादा चोट पहुँचती है, क्योंकि इससे उसके अंदर की यह ग़लत धारणा पुष्ट होती है कि वह महत्त्वहीन है।

किसी भी रिश्ते की शुरुआत में महिला अपने मनपसंद पुरुष को आँख के हल्क़े इशारे से बता देती है कि तुम मुझे सुखी बना सकते हो। यह इशारा करके वह दरअसल उनका संबंध शुरू करती है। यह निगाह पुरुष को क़रीब आने के लिए प्रोत्साहित करती है। इससे पुरुष के मन से संबंध बनाने का डर दूर हो जाता है, और वह आगे क़दम उठाता है। दुर्भाग्य से; जब एक बार रिश्ता जुड़ जाता है और समस्याएँ सामने आने लगती हैं, तो महिला यह भूल जाती है कि वह संदेश अब भी पुरुष के लिए कितना महत्त्वपूर्ण है, इसलिए वह इसे भेजने की उपेक्षा कर देती है।

संबंधों में महिलाओं की सबसे बड़ी शिकायत यह रहती है—मुझे यह महसूस ही नहीं होता कि सामने वाले ने मेरी पूरी बात सुनी है।

महिलाएँ तब ख़ुश होती हैं, जब उन्हें यह विश्वास होता है कि उनकी आवश्यकताएँ पूरी हो जाएँगी।

जिस तरह महिलाएँ माँगने में डरती हैं, उसी तरह पुरुष देने में डरते हैं।

कोई भी महिला इस नकारात्मक और ग़लत धारणा के प्रति विशेष रूप से अति संवेदनशील होती है कि वह प्रेम पाने के योग्य नहीं है। यदि बचपन में उसने बुरा बर्ताव देखा है या वह स्वयं इसका शिकार हो चुकी है, तो प्रेम पाने के योग्य नहीं होने के अहसास के प्रति वह और भी अधिक संवेदनशील होती है। इससे उसके लिए अपना महत्त्व तय करना कठिन हो जाता है। महत्त्वहीन होने का यह अहसास अचेतन मन में छिपा होता है, जिससे यह डर उत्पन्न होता है कि उसे अन्य लोगों की ज़रूरत होगी। उसके मन के एक कोने में कहीं यह कल्पना पैदा होती है कि उसे समर्थन नहीं मिलेगा।

किसी पुरुष का सबसे गहरा डर यह होता है कि वह पर्याप्त अच्छा नहीं है, या वह अक्षम है।

जब कोई महिला विचलित होती है, पस्त होती है, दुविधाग्रस्त होती है, थकी होती है या निराश होती है, तो उसे सबसे ज़्यादा ज़रूरत सिर्फ़ प्रेमपूर्ण साथी की होती है।

जब किसी महिला को अहसास होता है कि वह सचमुच प्रेम पाने की हक़दार है, तो वह एक दरवाज़ा खोल रही है; ताकि पुरुष उसे प्रेम दे सके, लेकिन जब विवाह में दस बरस तक महिला ही प्रेम देती रहती है और उसे बदले में कुछ नहीं मिलता, तब जाकर उसे यह अहसास होता है कि वह ज़्यादा की हक़दार है।

जब कोई पुरुष तनाव में होता है, तो वह सिर्फ़ एक ही समस्या पर अपना ध्यान केंद्रित करता है और बाक़ी समस्याओं को भूल जाता है। दूसरी तरफ़; जब कोई महिला तनाव में होती है, तो वह अपनी समस्याओं को फैला लेती है और उनके बोझ से दबी हुई महसूस करती है।

ख़ुद की दर्द भरी भावनाओं को भुलाने के लिए, महिला दूसरों की समस्याओं में भावनात्मक रूप से शामिल हो सकती है।

पुरुषों को प्रेरणा और शक्ति तब मिलती है, जब उन्हें महसूस होता है कि महिलाओं को उनकी ज़रूरत है। महिलाएँ तब प्रेरित और शक्तिशाली होती हैं, जब उन्हें महसूस होता है कि उनसे प्रेम किया जा रहा है।

अपनी क्षमता को साबित करने का अवसर मिलने पर पुरुष अपने सर्वश्रेष्ठ स्वरूप को व्यक्त करता है। जब उसे महसूस होता है कि वह सफल नहीं हो सकता, तभी वह अपने पुराने स्वार्थपूर्ण तरीक़ों की ओर लौटता है।

बचपन में कई पुरुषों के सफल रोल मॉडल नहीं होते। उनके लिए प्रेम को क़ायम रखना, शादी करना और परिवार पालना उतना ही मुश्किल होता है, जितना किसी प्रशिक्षण के बिना जम्बो जेट उड़ाना। वह विमान को हवा में उड़ाने में तो कामयाब हो सकता है, लेकिन वह यक़ीनन दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगा। जब आप विमान को कई बार दुर्घटनाग्रस्त कर देते हैं (या अगर आपने अपने पिता को दुर्घटनाग्रस्त होते देखा हो), तो इसके बाद उड़ान भरते रहना मुश्किल होता है। यह समझना आसान है कि संबंधों के अच्छे प्रशिक्षण मैन्युअल के बिना, कई स्त्री-पुरुष संबंधों में हार क्यों मान लेते हैं।

जब महिलाएँ समस्याओं के बारे में बोलती हैं, तो आम तौर पर पुरुष प्रतिरोध करते हैं। पुरुष को लगता है कि महिला उसके सामने अपनी समस्याओं का दुखड़ा इसलिए रो रही है, क्योंकि वह उसे ज़िम्मेदार ठहरा रही है।

मैंने बहुत-सी महिलाओं को इस बारे में आश्वस्त किया है कि बेहतर संबंध पाने के लिए उन्हें ज़्यादा प्रेम या सहायता देने की ज़रूरत नहीं है। उलटे, अगर वे कम देने

लगेंगी, तो उनका पार्टनर दरअसल उन्हें ज़्यादा देने लगेगा।

अपनी भावनाओं को पूरी तरह से अभिव्यक्त करने के लिए महिलाएँ आम तौर पर अतिशयोक्तियों, अलंकारों, सामान्यीकरण और इसी तरह की दूसरी स्वतंत्रताओं का भरपूर इस्तेमाल करती हैं।

ज़्यादातर पुरुषों को पता नहीं होता कि किसी महिला के लिए यह अहसास कितना महत्त्वपूर्ण होता है कि उसके पास किसी परवाह करने वाले का समर्थन है।

ज़्यादातर लोग प्रेम देने के लिए भूखे ही नहीं होते, बल्कि इसके लिए लालायित रहते हैं। उनकी सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वे यह नहीं जानते कि वे ख़ुद को कितने बड़े आनंद से वंचित रख रहे हैं।

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