जब पुरुष और महिलाएँ अपनी भिन्नताओं को समझ लेते हैं; उनका सम्मान करते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तो प्रेम को पल्लवित और विकसित होने का मौक़ा मिल जाता है।
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लक्ष्य-केंद्रित होने के बजाए महिलाएँ संबंध-केंद्रित होती हैं। वे अपनी अच्छाई, प्रेम और परवाह व्यक्त करने से ज़्यादा सरोकार रखती हैं।
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हमारे बच्चे बेहतर संसार के हक़दार हैं।
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पुरुष महिला के प्रतिरोध को ज़्यादा अच्छी तरह सँभाल सकता है, अगर वह यह समझ ले कि उसके समाधानों को अस्वीकार नहीं किया जा रहा है, बल्कि उसकी टाइमिंग और संवाद शैली को अस्वीकार किया जा रहा है।
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महिलाओं के 'स्व' का अहसास, उनकी भावनाओं और उनके संबंधों की गुणवत्ता से परिभाषित होता है।
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