ग़ुलामी पर कविताएँ

ग़ुलामी मनुष्य की स्वायत्तता

और स्वाधीनता का संक्रमण करती उसके नैसर्गिक विकास का मार्ग अवरुद्ध करती है। प्रत्येक भाषा-समाज ने दासता, बंदगी, पराधीनता, महकूमी की इस स्थिति की मुख़ालफ़त की है जहाँ कविता ने प्रतिनिधि संवाद का दायित्व निभाया है।

हाथी

वीरेन डंगवाल

खूँटा

शुभम् आमेटा

भारोत्तोलन

अविनाश मिश्र

बकरामंडी

उद्भ्रांत

मैं

समर्थ वाशिष्ठ

पराजय-गीत

बालकृष्ण शर्मा नवीन

पिंजरे में

अमेय कांत

कुत्ता

हरि मृदुल

राखी की सुध

बालकृष्ण शर्मा नवीन