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धर्म पर ग़ज़लें

धारयति इति धर्म:—यानी

जिसने सब कुछ धारण कर रखा है, वह धर्म है। इन धारण की जाती चीज़ों में सत्य, धृति, क्षमा, अस्तेय, शुचिता, धी, इंद्रिय निग्रह जैसे सभी लक्षण सन्निहित हैं। धर्म का प्रचलित अर्थ ‘रिलीज़न’ या मज़हब भी है। प्रस्तुत चयन में धर्म के अवलंब पर अभिव्यक्त रचनाओं का संकलन किया गया है।

मंदिर से मस्जिदों से

रामकुमार कृषक

धर्म- मजहब प आ

जौहर शफियाबादी

नेह घर से

जौहर शफियाबादी

जिनगी के रंग

जौहर शफियाबादी

सब फूल हमरा

जौहर शफियाबादी

ई का गजब भइल

जौहर शफियाबादी

आदमीयत के धरम

ए. कुमार ‘आँसू’

रो-रो के सनेहिया

जौहर शफियाबादी

बालू के देवार बा, बाबा

तैयब हुसैन पीड़ित

हर जगह बिसवास

कृष्णानन्द कृष्ण

ग़मज़दा

डी. एम. मिश्र

क्या हुआ यदि

रामकुमार कृषक