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मनुष्यता पर ग़ज़लें

आदमीयत के धरम

ए. कुमार ‘आँसू’

उठ रहल केकर

कृष्णानन्द कृष्ण

इंसान सुधरि जाय

अशोक अज्ञानी

विश्राम टा चाही

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

अब सुरक्षित कवन

अशोक द्विवेदी

हमरा जिनगी में भोर

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

सभकर मिजाज बाटे

गहबर गोवर्द्धन

अब गुलालो त असली

गहबर गोवर्द्धन

नाव डूबत है

अशोक अज्ञानी

आग नफरत के

कृष्णानन्द कृष्ण

आग रहे हवा

मिथिलेश ‘गहमरी’

मारा गया इंसाफ़

डी. एम. मिश्र