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दार्शनिक पर उद्धरण

दार्शनिक वह जिसके पास दर्शन (विजन) हो—प्रोफेटिक विजन, प्रोफेटिक टच के साथ।

आशीष नंदी

दर्शन का वास्तविक विषय मृत्यु है। सच्चा दार्शनिक मृत्यु के लिए इच्छुक रहता है, क्योंकि दार्शनिक ज्ञान चाहता है और इस शरीर में रहते हुए सच्चे ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। इसका अर्थ यह नहीं कि आत्महत्या करने से हमें मुक्ति मिल सकती है। आत्महत्या से तो जिस ईश्वर ने हमें शरीर-रूपी कारागार में डाला है, उसके नियमों का उल्लंघन होगा। ज्ञान-प्राप्ति की दृष्टि से मृत्यु का स्वागत करो।

सुकरात

भारतीय बुद्धिजीवी एक अत्यंत आत्म-सचेत प्राणी है, यद्यपि वह 'बुद्धिजीवी' शब्द की संतोषजनक व्याख्या करने में शायद ही समर्थ हो, वह छोटे-छोटे प्रवर्गों—कवि, साहित्यकार, लेखक, विचारक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, प्रवक्ता आदि से जुड़ा रहता है, और उन्हीं के तात्कालिक, अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों से अपनी आत्म-छवि को प्रक्षेपित करता है।

श्यामाचरण दुबे

सभी जानते हैं कि हमारे कवि और कहानीकार वास्तव में दार्शनिक हैं और कविता या कथा-साहित्य तो वे सिर्फ़ यूँ ही लिखते हैं।

श्रीलाल शुक्ल

मनुष्य केवल कलाकार ही नहीं होता, वह दार्शनिक भी होता है।

श्यामसुंदर दास

जो सब प्राणियों की रात्रि होती है, उसमें संयमी मनुष्य जागता है और जिस अवस्था में सब प्राणी जागते हैं, वह तत्त्वज्ञ मुनि की रात्रि होती है।

वेदव्यास

पारंगत दार्शनिक हुए बिना कोई भी व्यक्ति कभी महान कवि नहीं हुआ।

सैम्युअल टेलर कॉलरिज

दार्शनिक की आत्मा उसके मस्तिष्क में निवास करती है। कवि की आत्मा उसके हृदय में, गायक की गले में, किंतु नर्तकी की आत्मा उसके अंग-प्रत्यंग में बसती है।

ख़लील जिब्रान

इतिहास की अपेक्षा काव्य अधिक दार्शनिक और गंभीरतर अभिप्राययुक्त वस्तु है।

अरस्तु

दार्शनिक के लिए सत्य कहने का साहस प्रथम अर्हता है।

जॉर्ज विल्हेम फ़्रेडरिक हेगेल

एक दार्शनिक के लिए कितनी भी क्षुद्र परिस्थिति गौण नहीं होती।

ओलिवर गोल्डस्मिथ

दार्शनिक जिन्हें सिद्धांत कहता है, राजनेता उनमें वहम देखता है। और राजनेता जिसे पद और प्रभुता मानता है, दार्शनिक उसे माया का खेल और फ़रेब मानता है।

जैनेंद्र कुमार

मैं कई बड़े सवालों को लेकर अब भी स्पष्ट नहीं हूँ, लेकिन ये मेरा काम नहीं है। मैं उपन्यासकार हूँ, दार्शनिक नहीं।

लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

सब विद्वत्ता व्वर्थ है और दर्शनशास्त्र मिथ्या है।

जॉन मिल्टन

जैसे सर्वोतम धर्म वह है जो सभी धर्मों के सत्य को स्वीकारे, वैसे ही सर्वोतम दार्शनिक मत वह है जो सभी दर्शनों के सत्य को स्वीकारे और प्रत्येक को उसका उचित स्थान दे।

श्री अरविंद